इसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने उनके ट्वीट को रीट्वीट करते हुए पोस्ट किया, ''माननीय सर्वोच्च न्यायालय नवम्बर माह से बार-बार लगातार सड़क पर रह रहे बच्चों को पुनर्वासित करने का निर्देश दे रहे हैं, लेकिन दिल्ली सरकार की अकर्मण्यता से केवल 1,800 बच्चों को प्रक्रिया में लाया गया है। दिल्ली की सड़कों पर रह रहे 73,000 बच्चों की जानकारी दिल्ली सरकार को दो साल पहले दी गई थी, जिसमें से एक भी बच्चे को पुनर्वासित नहीं की गया। इसके लिए की गई समीक्षा बैठकों से दिल्ली सरकार गायब रही।''
न्यायालय के निर्देश का नहीं हुआ पालन
उन्होंने आगे कहा, ''न्यायालय के इस सम्बंध में नीति बनाने के निर्देश का आज तक पालन नहीं हुआ। अब जबकि सोमवार को माननीय न्यायालय में इस मामले की सुनवाई है तब अरविंद केजरीवाल झूठ बोल रहे हैं। मुख्यमंत्री की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति कि “दिल्ली के बालगृहों में बच्चों का खयाल नहीं रखा जाता एवं वे भागने को मजबूर हो जाते हैं।”को बेहद गम्भीरता से लिया गया है व नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण एवं कार्रवाई का विवरण मांगा जा रहा है।''