सिंचाई के लिए प्रतिदिन 14 करोड़ गैलन शोधित जल हासिल करने के बदले में दिल्ली को इतनी ही मात्रा में अशोधित पानी मुहैया कराने की योजना से उत्तर प्रदेश पीछे हट गया है। इस संदर्भ में दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह भी किया था। इसके बावजूद यूपी ने अपने कदम पीछे खींच लिए। यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर किए गए एक आवेदन में मिली है।
बैजल ने लिखा था खत
बैजल ने पत्र में लिखा था कि दिल्ली के पास खुद के पर्याप्त जल संसाधन नहीं हैं और वह अपने पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। इसलिए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया इस संबंध में संबंधित विभाग को आवश्यक दिशानिर्देश जारी करें। पिछले साल दो फरवरी को देव ने यूपी के मुख्य सचिव आरके तिवारी को पत्र लिखकर समझौते को अंतिम रूप देने का अनुरोध किया था।
सक्षम प्राधिकारी ने व्यवहार्यता रिपोर्ट को नहीं दी मंजूरी : यूपी
यूपी सरकार के कार्यकारी अभियंता ने नौ जुलाई 2021 को एक पत्र में डीजेबी को सूचित किया कि सक्षम प्राधिकारी ने व्यवहार्यता रिपोर्ट को मंजूरी नहीं दी है और इसे अमान्य माना जा सकता है। आरटीआई से मिले जवाब के अनुसार, यूपी सरकार ने योजना से पीछे हटने की वजह बताए बिना 70 लाख रुपये की राशि भी वापस कर दी। दस्तावेज से पता चलता है कि डीजेबी ने बाद में दिल्ली सरकार से कहा था कि यूपी सरकार की सहमति लेने के लिए उच्च स्तर पर दखल और अनुरोध किया जाना चाहिए, लेकिन उपराज्यपाल व मुख्य सचिव के अनुरोध पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।