हिंदी साहित्य भारती के एक कार्यक्रम में शनिवार को लोगों को संबोधित करते हुए मंत्री बघेल ने कहा कि जो देश अपनी संस्कृति, भाषा और पूर्वजों का सम्मान नहीं कर सकता, वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता।
केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह बघेल ने कहा है कि देश की आजादी के साथ ही हिंदी को विकास की भाषा घोषित कर दिया जाना चाहिए था। फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने यह साबित कर दिया है कि अंग्रेजी के बिना अपनी भाषा में शिक्षा और कामकाज करके देश को ज्यादा विकसित किया जा सकता है। यह देश का दुर्भाग्य है कि हिंदी को अब तक विकास की भाषा के रूप में विकसित नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में कभी अंग्रेजी का पखवाड़ा नहीं मनाया जाता है, लेकिन भारत में हिंदी का पखवाड़ा मनाने की आवश्यकता पड़ती है, यह हिंदी भाषा का अपमान है।
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हिंदी साहित्य भारती के एक कार्यक्रम में शनिवार को लोगों को संबोधित करते हुए मंत्री बघेल ने कहा कि जो देश अपनी संस्कृति, भाषा और पूर्वजों का सम्मान नहीं कर सकता, वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि यह समझने की आवश्यकता है कि मैकाले ने किन परिस्थितियों में अंग्रेजी भाषा में शिक्षा देने की नीति अपनाई थी। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से वह अंग्रेजीराज के प्रति समर्पित नौकर तैयार करना चाहती थी, जबकि आवश्यकता है कि नौकरशाही को जनता के प्रति ज्यादा समर्पित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि हिंदी को आगे बढ़ाने और उसे अपनाने की आवश्यकता है, तभी देश आगे बढ़ सकेगा।