क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से इंकार
विशेष न्यायाधीश हरीश कुमार ने क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि एजेंसी को आरएमपीएल के बढ़ते कारोबार और बैंकों द्वारा दिए गए विभिन्न ऋणों के लाभार्थियों के बीच कोई संबंध नहीं मिला है, जिसमें अर्चना भार्गव ईडी (कार्यकारी निदेशक) या सीएमडी थीं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों से स्पष्ट है कि 1.15 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रथम दृष्टया कानूनी नहीं है बल्कि केवल अवैध धन को छिपाने का प्रयास था। अदालत ने कहा यह अजीब है कि सीबीआई जैसी जांच एजेंसी ने जांच के दौरान लेनदेन में किसी भी अवैधता पर ध्यान नहीं दिया जबकि गहन जांच के लिए पर्याप्त सामग्री है।
अदालत ने कहा- केवल भार्गव की संलिप्तता खोजने के प्रयास हुए
अदालत ने कहा प्रतीत होता है कि सीबीआई ने केवल भार्गव की संलिप्तता के लिए सबूत खोजने का प्रयास किया, न कि लेनदेन की आगे की जांच करने के लिए। उन्होंने कहा कि फर्जी कंपनियों, धोखाधड़ी, गलत बयानी, हवाला लेनदेन, हवाला लेनदेन को कानूनी लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग आदि में बदलने के लिए दस्तावेजों को बनाने के पूर्ण साक्ष्य है।