स्नेहा एंटरप्राइजेज से खरीदा था सामान
डॉ. अनूप का कहना था कि आरोपियों ने निजी कंपनी स्नेहा इंटरप्राइजेज से करोड़ों रुपये का सामान खरीदा था। इसके लिए बकायदा सामान की जरूरत पैदा कर उसको मंगवाने की प्रक्रिया की गई। बिना माल पहुंचे ही माल की रिसीविंग दिखाकर पेमेंट रिलीज भी कर दी गई। एम्स प्रशासन को इसका पता चला तो मामले की शिकायत हुई।
प्रोग्राम असिस्टेंट था घोटाले का मास्टरमाइंड
आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर छानबीन की तो पता चला कि स्टोर कीपर बिजेंदर कुमार और राजेंद्र प्रसाद आई सेंटर के पूर्व निदेशक डॉक्टर अतुल कुमार से अटेच उनका प्रोग्राम असिस्टेंट इस पूरी वारदात का मास्टर माइंड है। इंस्पेक्टर दिनश दहिया व अन्यों की टीम ने खरीद-फरोख्त के बिल चेक किए तो उनमें गड़बड़ी पाई गई।
छानबीन के बाद पुलिस ने 29 अक्तूबर को निजी कंपनी की मालिक स्नेहा को गिरफ्तार लिया। इसके बाद से लगातार आरोपी बिजेंदर और नवीन फरार चल रहे थे। छानबीन के बाद पुलिस की टीम ने बुधवार को दोनों को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पुलिस रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ जारी है। दोनों से पूछताछ के बाद अस्पताल से जुड़े कुछ और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। आरोपी नवीन अस्पताल का अस्थाई कर्मचारी है।