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दिल्ली: एम्स के राजेंद्र प्रसाद आई सेंटर में 13 करोड़ के घोटाले में स्टोर कीपर, प्रोग्राम असिस्टेंट गिरफ्तार

Fri, 26 Nov 2021 07:40 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

कोविड काल में आरोपियों ने राजेंद्र प्रसाद आई सेंटर में इस्तेमाल होने वाले कॉटन के कपड़ों व अन्य सामान की खरीद-फरोख्त में निजी कंपनी के साथ मिलकर घोटाला किया था। आरोपियों ने बिना सामान दिए कागजों पर सामान की खरीद दिखाकर उसकी पेमेंट भी रिलीज कर दी थी। इस मामले में अक्तूबर में दिल्ली पुलिस ने निजी कंपनी की मालिक स्नेहा (59) को अक्तूबर में गिरफ्तार किया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
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विस्तार
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के राजेंद्र प्रसाद आई सेंटर में कपड़ों की खरीद-फरोख्त घोटाले से जुड़े मामले में बुधवार दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान स्टोर कीपर बिजेंदर कुमार (52) और प्रोग्राम असिस्टेंट नवीन कुमार (33) के तौर पर हुई है। मामले का खुलासा होने के बाद से ही दोनों फरार चल रहे थे।

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कोविड काल में आरोपियों ने राजेंद्र प्रसाद आई सेंटर में इस्तेमाल होने वाले कॉटन के कपड़ों व अन्य सामान की खरीद-फरोख्त में निजी कंपनी के साथ मिलकर घोटाला किया था। आरोपियों ने बिना सामान दिए कागजों पर सामान की खरीद दिखाकर उसकी पेमेंट भी रिलीज कर दी थी। इस मामले में अक्तूबर में दिल्ली पुलिस ने निजी कंपनी की मालिक स्नेहा (59) को अक्तूबर में गिरफ्तार किया था। अब पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के सूत्रों का कहना है कि मामले में कई और बड़े नाम भी शामिल हो सकते हैं।

पांच करोड़ के घोटाले का मामला हुआ दर्ज
आर्थिक अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह ने बताया कि सितंबर 2021 में एम्स के राजेंद्र प्रसाद आई सेंटर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनूप डागा ने ठगी की शिकायत आर्थिक अपराध शाखा से की थी। डॉ. अनूप ने अपनी शिकायत में पांच करोड़ के घोटाले के आरोप लगाए थे। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर छानबीन की तो रकम बढ़कर 13.85 करोड़ रुपये हो गई।

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स्नेहा एंटरप्राइजेज से खरीदा था सामान
डॉ. अनूप का कहना था कि आरोपियों ने निजी कंपनी स्नेहा इंटरप्राइजेज से करोड़ों रुपये का सामान खरीदा था। इसके लिए बकायदा सामान की जरूरत पैदा कर उसको मंगवाने की प्रक्रिया की गई। बिना माल पहुंचे ही माल की रिसीविंग दिखाकर पेमेंट रिलीज भी कर दी गई। एम्स प्रशासन को इसका पता चला तो मामले की शिकायत हुई।

प्रोग्राम असिस्टेंट था घोटाले का मास्टरमाइंड
आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर छानबीन की तो पता चला कि स्टोर कीपर बिजेंदर कुमार और राजेंद्र प्रसाद आई सेंटर के पूर्व निदेशक डॉक्टर अतुल कुमार से अटेच उनका प्रोग्राम असिस्टेंट इस पूरी वारदात का मास्टर माइंड है। इंस्पेक्टर दिनश दहिया व अन्यों की टीम ने खरीद-फरोख्त के बिल चेक किए तो उनमें गड़बड़ी पाई गई।
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छानबीन के बाद पुलिस ने 29 अक्तूबर को निजी कंपनी की मालिक स्नेहा को गिरफ्तार लिया। इसके बाद से लगातार आरोपी बिजेंदर और नवीन फरार चल रहे थे। छानबीन के बाद पुलिस की टीम ने बुधवार को दोनों को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पुलिस रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ जारी है। दोनों से पूछताछ के बाद अस्पताल से जुड़े कुछ और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। आरोपी नवीन अस्पताल का अस्थाई कर्मचारी है।
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