स्पेशल सेल के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स रैकेट के आका अफगानिस्तान और पुर्तगाल में बैठे हुए हैं। रिजवान ने अफगानिस्तान में बैठे हैंडलर ईशा खान के इशारे पर हेरोइन का धंधा चलाने की जानकारी दी। ईशा के कहने पर ही उसे गुरजोत व गुरप्रीत से हेरोइन मिलती है। उधर, गुरजोत और गुरप्रीत ने पुर्तगाल में मौजूद नवप्रीत सिंह उर्फ नव को अपना हैंडलर बताया।
गुरप्रीत और नवप्रीत की मुलाकात पंजाब की कपूरथला जेल में अन्य मामलों में बंद रहने के दौरान हुई थी। गुरप्रीत का कहना है कि वे नवप्रीत का आदेश मिलने के बाद ही देश के अलग-अलग राज्यों में हेरोइन की सप्लाई करते हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ड्रग्स को बेचकर हुई कमाई के आतंकी घटनाओं में इस्तेमाल किए जाने की आशंका है और इस नजरिये से भी जांच की जा रही है।
अफगानिस्तान से आता है कच्चा माल, मध्य प्रदेश में बनती है हेरोइन...
पुलिस जांच में पता चला है कि अफगानिस्तान के कई हिस्सों से अफीम व अन्य आवश्यक कच्चा माल भारत भेजा जाता है। तस्कर अफगानिस्तान से वैध तरीके से आने वाले मेवे, खड़िया, जिप्सम पाउडर आदि सामानों के बीच में इसके कार्टन छिपा देते हैं। बाकी सामान के साथ कंटेनर में छिपाकर रखी गई अफीम आदि ईरान से समुद्री मार्ग से मुंबई पहुंच जाती है।
मुंबई से अफीम व अन्य कच्चे माल को मध्य प्रदेश के शिवपुरी लाया जाता है। वहां बनी अस्थायी फैक्टरी में मध्य प्रदेश व दिल्ली की अलग-अलग दुकानों से खरीदे गए विभिन्न रसायनों की मदद से अफीम व बाकी मादक पदार्थों से हेरोइन तैयार की जाती है। हेरोइन तैयार करने की प्रक्रिया में अफगान नागरिक स्थानीय लोगों की मदद करते हैं।
इसके बाद कोरियर (तस्करी का सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने वाले) की मदद से हेरोइन को देश के अलग-अलग राज्यों में भेज दिया जाता है। पकड़े गए लोग इस रैकेट के इसी नेटवर्क के सदस्य हैं। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क के अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।