अब जिले के एक डीसीपी को रात में जिले में रुकना पड़ेगा। डीसीपी रात भर जिले में ही रहेंगे और पेट्रोलिग भी करेंगे। साथ ही डीसीपी को गंभीर अपराध की पीसीआर कॉल पर भी मौके पर जाना होगा। दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने इस तरह के आदेश जारी किए हैं। इस आदेश से जिला डीसीपी में हड़कंप मचा हुआ है।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की ओर से आदेश जारी किया गया है कि हर जिले में अब एक डीसीपी को रात में रूकना होगा। डीसीपी रात को इलाके में पेट्रोङ्क्षलग भी करेंगे। गौरतलब है कि हर जिले में तीन डीसीपी होते हैं।
जिला पुलिस उपायुक्त(डीसीपी) के हाथ में जिले की कमान होती है। इसके अलावा दो डीसीपी अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-एक व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-दो होते हैं। पुलिस आयुक्त ने कहा कि जिले में तीनों में से एक डीसीपी को क्रम के हिसाब से जिले में रूकना होगा।
अभी तक डीसीपी जिले में नहीं रूकते थे। डीसीपी सुबह ऑफिस आकर रात को घर चले जाते थे। दिल्ली पुलिस के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जिले में एक डीसीपी अब रात को रूकेगा। हालांकि रात में पूरी दिल्ली में डीसीपी स्तर का एक पुलिस आयुक्त रात में पेट्रोलिंग करता है। उसे अफसर को नाइट जीओ बोलते है।
दो दिन पहले दिल्ली पुलिस आयुक्त ने जारी कर कहा था कि थानाध्यक्ष हर पीसीआर कॉल पर मौके पर जाएंगे और मौके पर पहुंचने का वह वायरलैस पर मैसेज देकर बताएंगे कि वह पीसीआर कॉल होने के कितनी देर बाद मौके पर पहुंच गए। सब-डिवीजन एसीपी को भी गंभीर अपराध की पीसीआर कॉल पर जाने के आदेश जारी किए गए हैं।
जिलों की तरह अब ट्रैफिक पुलिस के भी होंगे 15 जिले
दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के ढ़ाचे में बड़ा बदलाव किया है। अब जिलों की तरह दिल्ली ट्रैफिक पुलिस में भी 15 जिले होंगे। सभी रेंज की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है। रेंज को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त स्तर के पुलिस अधिकारी संभालेंगे।
बताया जा पुलिस रहा है कि पुलिस आयुक्त ट्रैफिक, अपराध शाखा व आर्थिक अपराध शाखा में तैनाती का बड़ा नियम बनाने जा रहे हैं। जिन पुलिसकर्मियों को इन यूनिट में तीन वर्ष से ज्यादा हो गए हैं उनका दूसरी यूनिटों में तबादला किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की ओर से जारी आदेश मे कहा गया है कि दिल्ली में 1.30 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं और सड़कों की लंबाई 33 हजार किलोमीटर है। 15 से 20 लाख गाडिय़ां प्रतिदिन दिल्ली में आती हैं। दिल्ली में पिछले वर्ष सड़क हादसों में 2026 लोगों की जान गई है। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस में बदलाव किया जा रहा है।
वर्ष 1975 में शुरू हुई दिल्ली ट्रैफिक पुलिस में शुरू में एक डीसीपी, चार एसीपी और 16 सर्किल हुआ करते थे। इस समय दिल्ली ट्रैफिक पुलिस में एक विशेष पुलिस आयुक्त, दो संयुक्त पुलिस आयुक्त, चार अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, छह डीसीपी, 12 एसीपी और 53 ट्रैफिक सर्किल हैं। सर्किल का प्रभारी इंस्पेक्टर होता है।
नए बदलाव के अनुसार दिल्ली ट्रैफिक पुलिस में दो संयुक्त पुलिस आयुक्त होंगे। इस कार्यक्षेत्र स्पेशल सीपी जोन के बराबर होगा। छह अतिरिक्त पुलिस आयुक्त होंगे। इनका कार्यक्षेत्र जिला पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त के हिसाब से होगा। ट्रैफिक पुलिस में 15 जिले होंगे।
एक डीसीपी एक जिले की कमान संभालेगा। साथ सकलों की संख्या 53 से बढ़ाकर 67 कर दी गई है। पुलिस आयुक्त का कहना है कि अब एक ट्रैफिक सर्किल का इलाका थाने के इलाके के बराबर होगा। वह मानते है कि इससे दिल्ली के ट्रैफिक में सुधार आएगा।