ट्रैक्टर रैली के दौरान पुलिस कर्मियों पर पत्थर फेंकते लोग।
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दिल्ली पुलिस गणतंत्र दिवस वाले दिन हुई हिंसा के आरोपियों का ड्राइविंग लाईसेंस से पता कर रही है। दिल्ली पुलिस फेस रिकग्नाइजेशन सिस्टम (एफआरएस) सिस्टम से आरोपियों का चेहरा पता कर रही है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस रूट बनाकर आरोपियों को पहचाना जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने तीन रूट बनाए हैं और इन रूट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेजों का विशलेषण किया जा रहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया व लोगों के द्वारा दी गई वीडियो व फोटो से आरोपियों की पहचान की जा रही है।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शिबेश सिंह ने बताया कि प्रदर्शनकारी किसान जिन रास्तों से हिंसा वाली जगहों पर पहुंचे थे। उनके रूट बनाए गए हैं। इन रूट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। इसके अलावा स्पेशल सेल व अपराध शाखा की साइबर सेल ने सोशल मीडिया से हिंसा की वीडियो व फोटो उठाए हैं। साथ ही लोगों ने दिल्ली पुलिस को वीडियो भेजी हैं। इन सभी का डाटा एकत्रित किया जा रहा है। इन वीडियो व फोटो को एफआरएस सिस्टम में डाला जाएगा। दिल्ली पुलिस गुजरात फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की मदद से जांच कर रही है। यूनिवर्सिटी की पांच-पांच सदस्यों की टीमें दिल्ली पहुंच चुकी है।
ये टीमें केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय से लोगों को हरियाणा, यूपी, पंजाब, दिल्ली व राजस्थान के लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस का डाटा ले रही हैं। एफआरएस सिस्टम से वीडियो व फोटों को ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो मिलाया जाएगा। इससे आरोपी की पहचान हो सकेगी। इसके अलावा एफआरएस सिस्टम से ये भी पता लग सकेगा कि एक आरोपी कितनी जगह पर और कब-कब दिल्ली किसान हिंसा में शामिल रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस सिस्टम से कुछ आरोपियों का पता लगा है। कुछ चेहरो का पता लगा है।