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Delhi : हाईकोर्ट में पेश हुए पुलिस के आईओ, नहीं दे पाए जवाब, केस के बारे में पता ही नहीं था कुछ

Sat, 20 May 2023 06:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली

सार

महरौली थाने में तैनात एसआई रवि राणा बतौर जांच अधिकारी (आईओ) एक केस में हाईकोर्ट में पेश हुए, लेकिन उन्हें केस के बारे में कुछ भी पता नहीं था। 
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delhi high court - फोटो : ANI
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विस्तार
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श्रद्धा वालकर हत्याकांड की गुत्थी को सुलझाने का दावा करने वाली महरौली थाना पुलिस का एक और कारनामा सामने आया है। महरौली थाने में तैनात एसआई रवि राणा बतौर जांच अधिकारी (आईओ) एक केस में हाईकोर्ट में पेश हुए, लेकिन उन्हें केस के बारे में कुछ भी पता नहीं था। 

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हाईकोर्ट ने महरौली पुलिस की इस लापरवाही पर दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा के संज्ञान में लाने को कहा। इसके बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त ने अधीनस्थ अधिकारियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। साथ ही, दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी ने भी अफसरों को खूब लताड़ा।

दरअसल, महरौली थाने में दर्ज दहेज व तलाक से संबंधित एफआईआर (0634/2021) को रद्द होने के संबंध में पिछले सप्ताह हाईकोर्ट में सुनवाई थी। इस मामले में महरौली थाने से एसआई रवि राणा जांच अधिकारी बनकर हाईकोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने जब जांच अधिकारी से केस से संबंधित कुछ सवाल पूछे तो वे जवाब नहीं दे पाए। 
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इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ये मामला पुलिस आयुक्त के संज्ञान में लाया जाए। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब ये मामला पुलिस आयुक्त की संज्ञान में आया तो उन्हें दक्षिण जिले से संबंधित अधिकारियों को काफी खरी खोटी सुनाई। मीडिया से हमेशा दूरी बनाए रखने वाली दक्षिण रेंज की संयुक्त पुलिस आयुक्त मीनू चौधरी को भी उन्होंने पुलिस मुख्यालय बुलाया। 

दक्षिण जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसके बाद दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी ने महरौली थानाध्यक्ष पीसी यादव व महरौली व एसीपी विनोद नारंग को बृहस्पतिवार सुबह हौजखास स्थित कार्यालय बुलाया। उन्होंने दोनों को करीब ढ़ाई घंटे तक लताड़ लगाई। बताया जा रहा है कि महरौली पुलिस की वजह से जिले की काफी किरकिरी हुई है। 

पुलिस उपायुक्त ने कोर्ट व्हाट्सएप ग्रुप बनाया
घटना के बाद जिला पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी ने बृहस्पतिवार को ही एक हाईकोर्ट मैटर व्हाट्सएप ग्रुप बना दिया। इसमें जिले के सभी पुलिस अधिकारी जोड़े गए हैं। इसमें ये जानकारी दी जाएगी कि हाईकोर्ट के कौन से केस हैं। कौन जांच अधिकारी है। जांच अधिकारी कोर्ट में जा रहा है या नहीं आदि जानकारी दी जाएगी। 

कैसे बढ़ेगी सजा दर
कानून के जानकारों का कहना है कि अगर पुलिस इस तरह की लापरवाही करेगी तो फिर सजा दर में बढ़ोतरी कैसे होगी। अक्सर ये देखने में आता है कि जांच अधिकारी के व्यस्त रहने के कारण किसी दूसरे पुलिस अफसर को कोर्ट में भेज दिया जाता है। दूसरे जांच अधिकारी को केस के बारे में कुछ भी पता नहीं होता है।

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