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खुलासा: यूरोपीय देशों के नकली वीजा बनाकर करते थे ठगी, ऐसे किया जाता था तैयार, पंजाबी गानों पर पैसा लगाता था संजीव

Wed, 09 Feb 2022 08:23 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली पुलिस ने फर्जी वीजा बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 225 पासपोर्ट व नकली वीजा स्टिकर बरामद हुए हैं। दिल्ली के शकरपुर एरिया में फर्जी वीजा तैयार कर लोगों के साथ ठगी की जा रही थी।
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फाइल फोटो
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विस्तार
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फर्जी वीजा रैकेट का पर्दाफाश कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य विभिन्न देशों खासकर यूरोपीय देशों के नकली वीजा देकर लोगों के साथ ठगी करते थे। बताया जा रहा है कि ये नेपाल व बांग्लादेश का भी फर्जी वीजा बनाते थे। पुलिस ने इनके पास से 225 पासपोर्ट, भारी मात्रा में नकली वीजा स्टीकर और वीजा तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाला इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया है। आरोपियों ने नकली वीजा बनाने की छोटी यूनिट लगा रखी थी।
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स्पेशल सेल डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार इंस्पेक्टर चंद्रिका प्रसाद की टीम कई महीनों से राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने वाले प्रतिबंधित आतंकी संगठनों एफएफजे व केसीएफ के स्लीपर सेल की तलाश कर रही थी। ऐसे लोगों की जानकारी जुटाई जा रही थी कि जो स्लीपर सेल को विदेश भेजने में लगे हुए थे। 

इस दौरान पुलिस टीम को पता लगा कि दिल्ली के शकरपुर एरिया में फर्जी वीजा तैयार कर लोगों के साथ ठगी की जा रही है। टीम को फिर चार जनवरी को सूचना मिली थी कि टॉवर एंकलेव, वडाला चौक, जालंधर निवासी संजीव कुमार किसी से मिलने जनकपुरी औद्योगिक क्षेत्र में आएगा। 
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एसीपी संजय दत्त की देखरेख में इंस्पेक्टर चंद्रिका प्रसाद की टीम ने यहां घेराबंदी कर संजीव कुमार, गांव बकशीवाल राजपुरा, पटियाला निवासी लखविंदर उर्फ लाखा और गांव बरयार, थाना कुम्हन जिला गुरदासपुर, पंजाब निवासी राजवीर सिंह उर्फ रवि को गिरफ्तार कर लिया। इनसे नकली पासपोर्ट व वीजा स्टिकर बरामद किए गए। 

संजीव कुमार ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह नकली वीजा देकर लोगों के साथ ठगी करते थे। वह वीजा के लिए दिल्ली के शिवाजी स्टेडिमय के पास स्थित एक ऑफिस के जरिए आवेदन करता था। वह इस पते पर ग्राहकों के आवेदन जमा करता था। वह पता इसलिए देता था कि अगर किसी का वीजा अस्वीकृत हो जाए तो लोग उसके पास आ जाए, ताकि ये उनको नकली वीजा दे सके।

इनसे पूछताछ के बाद छह फरवरी को दिल्ली निवासी अनिल पॉल को लक्ष्मी नगर से व इसके बाद उसके पांडव नगर स्थित कार्यालय दुष्यंत उर्फ विक्की को गिरफ्तार कर लिया गया। सात फरवरी को पटपड़गंज, दिल्ली निवासी निवासी राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। अनिल पॉल व दुष्यंत सिंह फर्जी वीजा प्रिंटिंग ऑफिस चला रहे थे।

आरोपियों के कब्जे से ये सामान बरामद हुआ
आरोपियों के कब्जे से कनाड़ा, यूके, रूस, स्पेन, फ्रांस व नींदरलैंड आदि देशों के नकली वीजा स्टिकर व 225 पासपोर्ट बरामद किए गए। इनमें 90 भारतीय पासपोर्ट, 124 नेपाली पासपोर्ट और 11 बांग्लादेशी पासपोर्ट शामिल हैं। देशों के वीजा स्टिकर पर इस्तेमाल होने वाला होलोग्राम, स्टम्प बनाने समेत एंबेसियों की रबड़ स्टम्प, वीएफएस ग्लोबल के लिए देशवार लिफाफे, चार रंगीन प्रिंटर, एक लेजर प्रिंटर और एक यूपीएस आदि भी बरामद किया गया है। इसके अलावा वीजा तैयार करने के लिए रसायन, रेडियम पाउडर, गोंद, ग्लॉसी पेपर आदि भी बरामद किया गया है। 

ऐसे तैयार करते थे नकली वीजा
ये नकली वीजा तैयार करने के लिए स्कैन प्रिंटिंग विधि द्वारा ए4 साइज के चमकदार आकार पर रेडियम की कोटिंग करते थे। इसे फटा या अड्डा प्रिंटिंग कहा जाता है। इसके बाद कोरल ड्रा सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर अच्छी क्वालिटी वाले रंगीन लेजर प्रिंटर का उपयोग करके आवेदक की तस्वीर समेत विवरण मुद्रित किया जाता था। रेडियम कोटिंग के बाद पेपर पर होलोग्राम लगाया जाता था। इनकी अपनी होलोग्राम बनाने की इकाई थी, जिसमें होलोग्राम डाई व हीटिंग व प्रेसिंग यूनिट शामिल है। बाद में इस्तेमाल होने के लिए रोल तैयार किया जाता था। इसके बाद देश के वीजा के साइज के आकार में पेपर को काटा जाता था। ये एक ही चमकदार कागज पर डिलीवरी पता भी प्रिंट करते थे और बारकोड स्टिकर के साथ लिफाफे पर चिपकाते थे। आखिर में लिफाफा डिलीवरी के लिए एजेंटों को दे दिया जाता था। 
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संजीव पंजाबी गानों पर पैसा लगाता था

12वीं पास संजीव कुमार (49)  ने 2019 में  पंजाबी गानों पर फाइनेंसरों का पैसा लगाना शुरू कर दिया, लेकिन कोरोना के शुरू होते ही काम बंद हो गया। इसने वर्ष 2020 में खुद का प्रोडक्शन हाउस शुरू किया, लेकिन जैसे ही कोरोना काल आया तो काम चला नहीं। 

कोई शूटिंग नहीं हुई थी लेकिन सौदे लंबित हो गए। इससे इस पर कर्जा बढ़ता चला गया। कोविड-19 से पहले उसने पैसे लेकर चार लोगों को यूके भेजा। इसने लोगों से 50 से 60 हजार रुपये लिए। कुछ महीने पहले उसकी राजवीर सिंह से मुलाकात हुई और दोनों ने नकली वीजा बनाना शुरू कर दिया। 

ये वीजा के लिए ग्राहकों को ढूंढते थे। राजवीर पहले विदेश जाने के नाम पर ठगी का शिकार हुआ और फिर खुद नकली वीजा बनाने लगा। इसने 10 वर्ष पहले बतौर वीजा एजेंट का काम करना शुरू किया था। शुरू में उसने अपने कुछ जाने-माने लोगों को वर्क परमिट पर दुबई, कतर, अबू-धाबी आदि देशों में लेबर, बढ़ई आदि के काम के लिए भेजा था।

फिर कुछ समय बाद वह अनिल पॉल निवासी लक्ष्मी नगर के संपर्क में आया। दिल्ली, जो अलग-अलग देशों के फर्जी वीजा की व्यवस्था करने के धंधे में था। इसलिए, अनिल पॉल की मदद से राजवीर ने अपने ग्राहकों को फर्जी वीजा देना शुरू किया। 
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