नई दिल्ली। मुंडका हादसे में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इमारत के अंदर लोग जिंदा जल रहे थे और बाहर इंसानियत दम तोड़ रही थी। भयावह घटना के बाद भी लोग तमाशबीन बने रहे और मोबाइल से वीडियो बनाते रहे। किसी ने दमकल को समय रहते सूचना नहीं दी। करीब 41 मिनट बाद फायर ब्रिगेड को कॉल की गई। आनन-फानन अग्निशमन कर्मचारी घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े, लेकिन रास्ते में 15 से 20 मिनट तक गाड़ियां जाम में फंसी रही। इस प्रक्रिया में करीब एक घंटा लग गया और तब तक इमारत 27 लोगों की सामूहिक चिता बन चुकी थी।
दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतुल गर्ग ने यह खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि यदि बचाव दल समय पर पहुंच जाता तो मरने वाले लोगों की संख्या को शायद कम किया जा सकता था। शुरुआती जांच के बाद पता चला है कि बिल्डिंग में आग 4.00 बजे के आसपास लगी थी, लेकिन किसी ने इसकी खबर न तो पुलिस और न ही दमकल विभाग दी। 4.41 पर दमकल विभाग को कॉल की गई। इसके बाद 4.50 के आसपास पुलिस को खबर दी गई। घटनास्थल तक पहुंचने में भी दमकल की गाड़ियों को खासी मशक्कत करना पड़ी। मौके पर लंबा जाम लगा था। ऐसे में कॉल मिलने के 15 से 20 मिनट की देरी से दमकल की गाड़ियों मौके पर पहुंच सकीं और राहत व बचाव कार्य शुरू हो सका।
गर्ग ने बताया कि सूचना मिलने के बाद आसपास के चार दमकल केंद्रों से तुरंत दर्जनभर गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। घटना पर पहुंचने वाली सड़क पर पीरागढ़ी तक जाम लगा हुआ था। बड़ी मुश्किल से सड़क के एक कैरिज्वे को खाली करवाकर वहां पर गाड़ियां पहुंची। हालात को देखते हुए वहां करीब 30 गाड़ियों को बुलाया गया। दमकल के करीब 125 जवान राहत और बचाव कार्य में जुट गए। आग पर शुक्रवार रात 10.50 बजे काबू पा लिया गया था, लेकिन अगले दिन शनिवार दोपहर 12.00 बजे कुलिंग का काम चलता रहा। गर्ग ने बताया कि इमारत में दमकल की एनओसी थी या नहीं, वह अलग बात है, लेकिन बिल्डिंग में बड़े हादसे का सारा सामान मौजूद था। इमारत में आने-जाने के लिए जिन सीढ़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा था, उसी पर बिजली के मीटर लगे थे। सीढ़ियों पर ही जेनरेटर रखने के साथ भारी मात्रा में पैक सामान रखा था। आग लगी तो वह तेजी से ऊपर बढ़ती चली गई।
कोविड के बाद फैक्टरियों में अंधाधुंध हो रहे काम से बढ़ रही घटनाएं
अतुल गर्ग ने बताया कि अमूमन गर्मी का मौसम आते ही आग की घटनाओं में इजाफा होता है, लेकिन इस साल आग लगने की घटनाएं कुछ ज्यादा सामने आ रही हैं। इनमें भी निजी फैक्टरियों में आग लगने के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। अकेले अप्रैल की बात करें तो 30 दिनों के भीतर 4140 कॉल आईं। वहीं, मई के शुरुआती 13 दिनों में इन कॉल की संख्या 1295 रही। गर्ग ने बताया कि आग की कॉल बढ़ने की एक वजह कोविड के बाद अचानक उत्पादन बढ़ाने के लिए राजधानी की फैक्टरियों में 24-24 काम करवाना है।
फायर की एनओसी हो या नहीं, लेकिन आग से बचाव के रखें इंतजाम
लाख प्रयासों के बाद भी राजधानी के कई इलाकों में प्रशासन की मिलीभगत से इस तरह की अवैध फैक्टरियां चल रही हैं। कोई बड़ा हादसा होता है तो सभी को नियम कानून याद आने लगते हैं। दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतुल गर्ग ने कहा कि जरूरी नहीं है कि ऐसी फैक्टरी या कोई कंपनी चलाने वाले मालिक के पास फायर की एनओसी या काम करने का लाइसेंस हो। कम से कम ऐसे लोग आग से बचाव के कुछ इंतजाम अपने स्थिर पर कर सकते हैं। बेसिक इंतजाम करने से न सिर्फ समय पर हादसा को टाला जा सकता है, बल्कि उससे जान-माल के नुकसान की संभावना भी कम हो जाती है।
इन बातों का ध्यान रखकर आग की घटनाओं को किया जा सकता है कम
. हमेशा फैक्टरी या कंपनी में आग से बचाव के बेसिक इंतजाम (अग्निशमन सिलिंडर, पानी का इंतजाम) करना चाहिए।
. गर्मियों के दौरान ऑफिस, दफ्तर में चलने वाले एसी को लगातार न चलाएं। उसे कुछ देर के लिए बंद जरूर दें। ऐसा करने से शार्ट सर्किट की संभावना कम होगी।
. समय-समय पर अपनी कंपनी, दफ्तर व घरों की वायरिंग की जांच जरूर करवाएं। यदि वायरिंग पर जरा भी शक हो तो उसे तुरंत बदलवा दें।
. हमेशा सीढ़ियों की जगह को खाली रखें। वहां कभी भी कोई सामान न रखें। लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं तो सप्ताह में एक दिन सीढ़ियों का प्रयोग करें।
. दमकल की ओर से हर विभाग को मुफ्त में आग से बचाव की ट्रेनिंग दी जाती है। यदि संभव को तो अपने कर्मचारियों के लिए इसका लाभ जरूर लें।