मौसम मे बदलाव के चलते राजधानी दिल्ली में लोग संक्रमण से हो रही बीमारियों से परेशान है। कमजोरी, बदन दर्द, बुखार, उल्टी, सिर में दर्द के साथ-साथ खाना बेस्वाद लगना, सोते समय बेचैनी और सर्दी के विकार से ग्रस्त लोग करीब-करीब हर अस्पताल में दिख रहे हैं। सरकारी और प्राइवेट अस्पताल का हाल लगभग एक जैसा है, ओपीडी में काफी संख्या में मरीज ये परेशानियां लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का यहां तक कहना है कि मौसम में बदलाव के कारण हेपेटाइटिस के मामले भी बढ़ जाते हैं।
लेडी हार्डिंग अस्पताल में कम्युनिटी मेडिसन विभाग के डॉ. शिवाजी के अनुसार, हर उम्र के लोगों में संक्रमण से हुई बीमारियां नजर आ रही है। उनकी ओपीडी में खांसी और बुखार के 60 से 70 फीसदी मामले ऐसे हैं। साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. विवेक कुमार का कहना है कि दिल के रोगियों को यह मौसम काफी दिक्कत देता है। सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि घर के आसपास पानी का जमा होना बुखार आने का कारण बनता है। इससे डेंगू, चिकनुगनिया के मामले सामने आते हैं। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में मेडिसन विभाग के प्रमुख डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण ओपीडी में करीब 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।
इन बातों का रखें ध्यान
- बाहर के खाने से बचें। पानी साफ या उबालकर पिएं। पेट की दिक्कत ज्यादातर खराब पानी से होती है।
- मसालेयुक्त खाने से परहेज करें। खाना हाथ साफ करके ही खाएं।
- शाम के समय कपड़े पूरे पहनें। एसी और पंखे एकदम न चलाएं।
- भीड़भाड़ भरे इलाके में जाने से बचें। ऐसे इलाके में कोई खांसेगा तो उससे फैला संक्रमण आपको चपेट में ले सकता है।
- शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है। ऐसे में लगातार पानी पिएं।
इन बीमारियों से दिक्कत ज्यादा
- मलेरिया
- डेंगू
- चिकनगुनिया
- पीलिया
- पेट से जुड़े संक्रमण
- टाइफाइड
- कमजोरी, बुखार
इनका रखें खास ख्याल
- बच्चों और बुजुर्गों में रोग प्रतिरक्षा क्षमता कम होती है। इनके खानपान पर पूरी नजर रखनी चाहिए।
- घर में कोई गर्भवती महिला है तो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उसकी दिनचर्या पर पूरी नजर रखना जरूरी है।
- पीने के पानी का प्रदूषण भी आम है। दस्त और पेट से जुड़े संक्रमण को रोकने के लिए स्वच्छ और शुद्ध पानी पीना महत्वपूर्ण है।
- गंदे पानी में घूमने से कई फंगल संक्रमण हो जाते हैं, जो पैर की अंगुलियों और नाखूनों को प्रभावित करते हैं।
- मधुमेह के रोगियों को ऐसे संक्रमण का ख्याल रखना चाहिए, जो पैर की अंगुलियों और नाखूनों को प्रभावित करते हैं। उन्हें हमेशा सूखा और साफ रखना चाहिए।
- घर में कोई अस्थमा रोगी है तो आपको कीटनाशक के छिड़काव से बचना होगा।
5 दिन रह सकता है विकार
डॉक्टरों के अनुसार, मानसून के मौसम में आया बुखार भ्रामक हो सकता है। इन दिनों होने वाली अधिकांश बीमारियां 4 से 7 दिन में अपने आप ठीक हो जाती हैं। बुनियादी सावधानी में उचित हाइड्रेशन खास है। विशेषकर उन दिनों में, जब बुखार उतर रहा हो। हालांकि, संबंधित स्थितियों वाले किसी भी बुखार को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए और डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
बचाव करना भी जरूरी
- बिना धोए या उबाले पत्तेदार सब्जियां न खाएं, क्योंकि उन पर कीड़ों के अंडे हो सकते हैं।
- इस मौसम में बिजली से होने वाली मौतों से सावधान रहें। बिना अर्थिंग वाले बिजली कनेक्शन से झटका लग सकता है।
- नंगे पैर नहीं चलें, क्योंकि इस मौसम में जमीन के नीचे रहने वाले कीड़े बाहर आ जाते हैं और संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
- बारिश के दिनों में स्नान के समय रक्तचाप में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए दवाओं का पुनरीक्षण किया जाना चाहिए।
- रुके हुए पानी में बच्चों को न खेलने दें। इसके संक्रमण से लैक्टोसिरोसिस (पीलिया के साथ बुखार) हो सकता है।