दिल्ली सरकार अगले तीन साल में यमुना नदी को निर्मल करने के साथ ही राजधानी को वायु प्रदूषण मुक्त करने की तैयारी कर रही है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बजट में इसका खाका पेश किया। दिल्ली में जल शोधन संयंत्रों व इंटरसेप्टर योजना के पूरा होने के बाद यमुना नदी में गंदा पानी नहीं गिरेगा। प्रदूषण को कम करने की दिशा में अभी से काम शुरू कर दिया जाएगा और उम्मीद है अगले 25 सालों में दिल्लीवासी साफ हवा ले सकेंगे।
सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली सरकार ने जल शोधन संयंत्र (एसटीपी) और इंटरसेप्टर की मदद से यमुना को तीन वर्ष के भीतर स्वच्छ बनाने का लक्ष्य रखा है। एसटीपी की मदद से यमुना में गिरने वाले गंदे पानी को रोका जाएगा। इंटरसेप्टर सीवर परियोजना का काम भी लगभग पूरा हो गया है। दिल्ली में पानी की आपूर्ति बेहतर करने के लिए दिल्ली सरकार ने जलापूर्ति नेटवर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में करीब 93 फ़ीसदी परिवार 14,500 किलोमीटर की पाइप लाइन के नेटवर्क से जलापूर्ति प्राप्त कर रहे हैं। यह नेटवर्क 1622 अनधिकृत कॉलोनियों को कवर करता है। इसके अलावा गैर राजस्व को समाहित करने के लिए 3170 बल्क फ्लोमीटर स्थापित किए गए हैं और 121 स्थापना की प्रक्रिया में चल रहे हैं। दिल्ली सरकार ने मुख्यमंत्री फ्री सीवर कनेक्शन योजना को इस वर्ष भी जारी रखा है। इस योजना के तहत पिछले वर्ष 4,88000 सीवर कनेक्शन नियमित किए थे। सरकार ने जल बोर्ड के द्वारा 771 प्रतिष्ठानों में से 585 में वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित होने की भी जानकारी दी है। साथ ही शेष के लिए इस वर्ष के मानसून से पहले पूरा होने की उम्मीद जताई है।
25 साल में हवा हो जाएगी साफ
सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार वायु व जल प्रदूषण पर निगरानी के लिए आईआईटी दिल्ली व कानपुर के साथ मिलकर काम कर रही है। दिल्ली जब आजादी का 100वां का जश्न मनाएगी, तब दिल्लीवाले साफ हवा में सांस लेंगे। प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली सरकार कई मोर्चों पर काम कर रही है। ई-वाहन पॉलिसी दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकेगी। वहीं, हरित क्षेत्र का विस्तार करने के साथ पराली के प्रदूषण को रोकने के लिए पूसा के साथ बॉयो-डिकंपोजर तैयार करवाया गया है। इसके अलावा सड़कों की मैकेनिकल क्लीनिंग, निर्माण स्थलों पर स्मॉग गन भी लगाई गई है।
2024 तक 25 फीसदी ई-वाहन होंगे
राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार का ई-वाहनों पर जोर रहेगा। सरकार ने लक्ष्य तय किया है कि 2024 तक दिल्ली में पंजीकृत होने वाले नए वाहनों में से कम से कम 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन होंगे। इस वक्त दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 72 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन कार्यरत हैं। इनकी संख्या बढ़ाकर 500 तक पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा रैपिड चार्जिंग प्वाइंट भी बनाए जा रहे हैं। वहीं, सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में ई- बस को बढ़ावा देने के लिए सरकार सड़कों पर 1300 ई- बसें लाने की तैयारी है। क्लस्टर योजना के तहत अगले साल के मध्य तक 1000 नई ई-बसें भी सड़कों पर देखने को मिलेंगे। इसके सहारे दिल्ली को ई-वाहनों का हब बनाने की योजना कारगर तरीके से लागू की जा सकेगी।
निर्माण स्थलों पर एंटी स्मॉग गन लगाना जरूरी
उपमुख्यमंत्री ने दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए भी प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत निर्माण स्थलों पर एन्टी स्मॉग गन स्थापित करना अनिवार्य कर दिया है। वहीं, दिल्ली में दो स्मॉग टावर की स्थापना भी अंतिम चरण में चल रही है। वायु-जल और भूमि प्रदूषण पर निगरानी के लिए एक वास्तविक समय आकलन प्रणाली आईईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर के सहयोग से भी लागू की जा रही है। साथ ही देश की पहली ट्री प्लांटेशन नीति भी दिल्ली में लागू की गई है। इसके तहत अनिवार्य है कि किसी परियोजना के लिए हटाए गए पेड़ों में से कम से कम 80 फ़ीसदी पेड़ अन्य स्थानों पर ट्रांसप्लांट किए जाएंगे। बजट में दिल्ली में हरित क्षेत्र के 21.8 फ़ीसदी बढ़ने की उपलब्धि बताई गई है।
बॉयो-डिकंपोजर से खत्म होगी पराली के धुएं की समस्या
पराली के प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए जैव डीकंपोजर्स के उपयोग पर जोर दिया है। इसके साथ ही प्लास्टिक पर प्रतिबंध, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व अपशिष्ट जल उपचार का बेहतर प्रबंधन, खुले में कचरा, पत्तों को जलाने पर रोक व थर्मल पावर प्लांट बंद करना आदि शामिल रहे हैं।
जहां झुग्गी वहीं मकान योजना पर जोर
सरकार ने जहां झुग्गी, वहीं मकान योजना के तहत लोगों को आवास प्रदान करने के लिए ‘इन-सीटू यानी स्व-स्थाने स्लम पुनर्वास’ योजना तैयार की है। सुल्तानपुरी और निकटवर्ती झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोगों को 1060 घर आवंटित करने का काम अंतिम चरण में चल रहा है। इसके अलावा करोल बाग के देव नगर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए 784 बहुस्तरीय घरों का निर्माण शुरू हो गया है। दिल्ली को खुले में शौच मुक्त करने के लिए भी सरकार ने घोषणा की है। इसमें एनडीएमसी, एसडीएमसी और ईडीएमसी की मलिन बस्तियों को शौच मुक्त किया गया है। दूसरी ओर, दिल्ली आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) ने 674 जन सुविधाएं परिसर वेस्टर्न सीट वाले 21,586 शौचालय बनाकर तैयार किए हैं।
मुफ्त पानी योजना के लिए 600 करोड़ रुपये
सरकार ने मुफ्त पानी सब्सिडी योजना के तहत 600 करोड़ की सब्सिडी का प्रस्ताव पेश किया है। इससे प्रत्येक माह छह लाख परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। वहीं, पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए जल बोर्ड की नौ प्रयोगशाला हैं जो 24 घंटे काम कर रही हैं।