- दिल्ली के सभी बस रूट्स को तर्कसंगत बनाया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद जरूरत के हिसाब से हर रूट पर बसें होंगी।
- कोरोना काल से पहले नजफगढ़ इलाके में इसका सफल ट्रायल हुआ था। अब एक बार फिर सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें ध्यान उन रूट पर ज्यादा है, जहां बसें अभी नहीं हैं।
- बसों की टिकटिंग प्रणाली में भी बदलाव हो रहा है। इसके लागू होने से क्यूआर कोड को स्कैन कर यात्री टिकट या डेली पास ले सकेंगे। इसका ट्रायल चल रहा है। इससे यात्रियों का समय बचेगा।
- दिल्ली सरकार रीयल टाइम मॉनीटरिंग के लिए एप विकसित कर रही है। इससे यात्रियों की बसों की वास्तविक लोकेशन सही समय पर मिलेगी। इससे वह अपनी यात्रा समयबद्ध तरीके से तय कर सकेंगे।
- चार्टर व वन डेली एप से रूट विशेष पर जाम आदि से जुड़ी जानकारियां भी मिल सकेंगी। अगले एक महीने में इसे लांच करने की योजना है।
- बसों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भी दिल्ली सरकार ने कदम बढ़ा दिया है।
- लास्ट माइल कनेक्टिविटी की सुविधा बढ़ाने के लिए ई-वाहन पॉलिसी लांच की गई है। इसके तहत कालोनियों के अंदर तक छोटे ई-वाहन पहुंच सकेंगे।
- इस दिशा में मेट्रो ने भी पहल की है। बृहस्पतिवार को जामिया नगर में मेट्रो प्रशासन में पहली ई-रिक्शा सेवा लांच की है।
ट्रैफिक पुलिस का जाम मुक्त दिल्ली अभियान
-सड़कों पर अवैध पार्किंग व अतिक्रमण के लिए विशेष अभियान चला रखा है। इससे आरडब्ल्यूए व एमडब्ल्यूए को भी जोड़ा गया है।
-कैमरा एप से अवैध रूप से पार्क वाहनों को चालान किया जा रहा है।
-ट्रैफिक पुलिस के टोडापुर स्थित हेडक्वार्टर से गूगल से जुड़ी हुई सात से आठ बड़ी स्क्रीन लग रही है। दिल्ली में जहां भी जाम लगता है इन स्क्रीन पर दिख जाता है। इसके बाद कंट्रोल रूम से संबंधित ट्रैफिक सर्किल इंस्पेक्टर को फोन कर जाम के बारे में सूचित किया जाता है और जल्द ही जाम को खुलवाने के आदेश दिए जाते हैं।
-दिल्ली ट्रैफिक पुलिस पीडब्ल्यूडी के साथ मिलकर सड़कों की इंजीनियरिंग को देख रही है। जहां जरूरत पड़ी है वहां पर बैक टू बैक यू-टर्न बना दिया जाता है। पिछले सप्ताह लाइट सिग्नल को खत्म कर मजनू का टीला में इस तरह का यू-टर्न बनाया गया था।
-सोशल मीडिया के जरिए आम दिल्लीवालों को रीयल टाइम अपडेट भी दिया जाता है।
- दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अपनी ट्रैफिक इंटेलीजेंट मैनेजमेंट सिस्टम के तहत जगह-जगह स्क्रीन लगा रही है। आगे रोड पर जाम होता है तो पुलिस स्क्रीन पर जाम के बारे में बता देती है। स्क्रीन देखकर वाहन चालक अपने मार्ग पर बदल लेते हैं।
बढ़ रहा डीटीसी बसों का बेड़ा
. दिल्ली में बसों की संख्या 6,752 है। इसमें डीटीसी की 3,762 व क्लस्टर की 2,990 बसें हैं। जबकि दिल्ली में 11000 बसें चलाई जा सकती हैं।
. डीटीसी के बेड़े में 1000 बसें शामिल की जाएंगी। लो फ्लोर एसी बसों की पहली खेप जून में सड़कों पर उतार दी जाएंगी।
. दिसंबर, 2021 तक डीटीसी के बेड़े में 300 इलेक्ट्रिक शामिल होंगी।
. क्लस्टर की 1000 नई स्टैंडर्ड फ्लोर बसें खरीदी जाएंगी।
. 1000 लो फ्लोर एसी बसों की खरीद के तहत 311 बसें संचालित हो रही हैं। 89 मार्च तक 89 बसें पहुंचेंगी। सितंबर तक क्लस्टर के बेड़े में 1000 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल होंगी।