कोराना की मार से दिल्ली का व्यापार ठीक से पटरी पर लौटा भी नहीं है कि दोबारा संक्रमण की धमक ने उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी है। लॉकडाउन की चिंता से अधिक मजदूरों के पलायन का डर है। क्योंकि दिल्ली के बाजारों में चर्चा आम हो गई है कि पिछले साल की तरह ही इस साल भी कोराना का संक्रमण तेज हो गया है। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा होली को लेकर जारी गाइडलान का असर भी उद्योग-धंधों पर पडने लगा है।
मजदूरों के पलायन का डर एक बार फिर दिल्ली के व्यापारियों को सताने लगा है। लॉकडाउन के बाद बड़ी मिन्नत करके मजदूरों को व्यापारियों व उद्यमियों ने तो दिल्ली उन्हें बुला लिया, लेकिन इस बार यह डर सता रहा है कि इस बार निकले तो फिर वापस होने में भी ज्यादा वक्त लग जाएगा, ऐसे में काम-धंधा बिलकुल डप होने का खतरा है।
पैदल चलने का खतरा इस बार नहीं मोल लेना चाहते
पिछले साल लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही मजदूर पैदल ही पलायन करने लगे थे। इस बार मजदूर इस तरह केखतरे को मोल लेना नहीं चाह रहे है। वह बार-बार फैक्ट्री मालिक व व्यापारियों से पूछ रहे है कि कोरोना की स्थिति भयावह तो पिछले साल की तरह नहीं होगी। दरअसलयातायात के संसाधान बंद होने का डर उन्हें सता रहा है। जबकि यह संभावना नहीं के बराबर है।
व्यापारियों में कोरोना से ज्यादा डर मजदूरों के पलायन से
व्यापारियों व उद्यमियों में कोरोना से ज्यादा डर मजदूरों केपलायन कर जाने से लग रहा है। बाजार व औद्योगिक क्षेत्रों में यह भी चर्चा का विषय है कि मुंबई से मजदूर पलायन करने लगे है। ऐसे में सदर बाजार, चांदनी चौक, बव ाना, नरेला, वजीराबाद इंडस्ट्रियल एरिया में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
सरकार सख्ती दिखाए तो बात बने
- लोग लापरवाही छोड़े, मास्क चेहरे से नहीं उतारे
- बाजार में समाजिक दूरी का प्रशासन पालन कराए
- अफवाहों पर लगाम लगे
- मजदूरों को समझाया जाए कि टीका लगाने का अभियान जोरों पर है
- चालान काटना प्रशासन शुरू करें
बोले कारोबारी...
मजदूरों के पलायन का डर एक बार फिर बढ़ गया है। बार-बार मजदूर पूछने आ रहे है कि लॉकडाउन तो नहीं होगा। दरअसल उन्हें यह डर सता रहा है कि यातायात के संसाधन बंद हुए तो पैदल ही रवाना होना पड़ेगा। सबसे ज्यादा खतरा रियूमर से है। क्योंकि मजदूरों का एक वर्ग निकलना शुरू हुआ तो फिर पलायन रोकना मुश्किल हो जाएगा।
देवराज बावेजा, अध्यक्ष दिल्ली व्यापार महासंघ अध्यक्ष।
रॉ मटेरियल की महंगाई फिर कोरोना ने व्यापार का दम निकाला
एक तो पहले ही रॉ मटेरियल काफी महंगा है। मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, लोहा समेत सभी मटेरियल 30-50 प्रतिशत तक ज्यादा है। इस वजह से फैक्ट्री में प्रोडक्शन भी कम है। पिछले चार महीने से प्रोडक्शन में तेजी भी आई तो अब एक बार फिर कोरोना का भय मजदूरों में सताने लगा है।
संतोष राय, उद्यमी कॉपर मैन्यूफैक्चिरिंग यूनिट
सदर बाजार में दो लाख यात्री रोजाना आते रहते है। कोविड को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। प्रशासन की तरफ से इंतजाम होना चाहिए। व्यापारियों का वर्ग प्रशासन को सहयोग करने को तैयार है। जहां तक मजदूरों की बात है तो चर्चा तो जरूर है, लेकिन त्योहार के मौसम में पलायन की नहीं सोच रहे है। रोग प्रतिरोधक क्षमता मजदूरों में बेहतर है।
राजेंद्र शर्मा, महासचिव फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन