हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्ची को देह व्यापार में धकेलने वाली महिला को जमानत प्रदान करने से इंकार कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप है और जमानत प्रदान करने के बाद वह पीड़िता पर दवाब बना सकती है।
न्यायमूर्ति सुब्रामण्यम प्रसाद ने अपने फैसले में गुरुग्राम में एक पीजी में काम करने वाली महिला कशिश बत्रा के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। अदालत ने कहा कि पेश साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी 16 वर्षीय बच्ची को देह व्यापार के मामले में लिप्त है। इतना ही नहीं इस बात के बात के साक्ष्य है कि वह सहआरोपी इमराना से नियमित संपर्क में थी। वह बच्चियों से यौन अपराध जैसे गंभीर अपराधों में शामिल है।
अदालत ने आरोपी के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि मामले में प्राथमिकी काफी देरी से दर्ज करवाई गई है। अदातल ने कहा कि बच्ची की चाईल्ड वैलफेयर कमेटी में काउंसलिंग करवाई गई और तथ्य सामने आने के बाद मामला दर्ज हुआ। ऐसे में आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं है।
अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह मामले का एक वर्ष के भीतर निपटारा करे।
पेश मामले के अनुसार संगम विहार इलाके निवासी 8वीं की छात्रा एक लड़के से प्यार करती थी। उसके पिता ने लड़के से चैटिंग करते हुए उसे पकड़ लिया वहीं दूसरी बार उसके भाई ने पकड़ा व उसे थप्पड मार दिया। इसी बात से नाराज होकर वह घर से भाग गई। उसे रास्ते में इमराना नामक महिला मिली व उसकी सहायता के नाम पर गुडगांव ले गई। वहीं याचिकाकर्ता महिला मिली व उसे एक होटल में रखा व तीन दिन तक उससे राशिद नाम के व्यक्ति ने दुष्कर्म किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार इसके बाद बच्ची को मेरठ, नोएड़ा, दिल्ली इत्यादि स्थानों पर ले जाया गया व उसके साथ दुष्कर्म किया गया। सह मामला अक्तूबर 2020 में दर्ज किया गया था।