दिल में दर्द से परेशान 54 साल की महिला की सर्जरी होनी थी। शरीर इतना मजबूत नहीं था कि मरीज सर्जरी का जख्म सह पाता। रोग बढ़ता ही जा रहा था। डॉक्टर भी परेशान थे, कि महिला की जान कैसे बचेगी। ऐसे में आशा की किरण बनकर सामने आया रोबोट। सफदरजंग अस्पताल में हाल में शुरू हुए रोबोटिक प्रोग्राम के मदद से सर्जरी करने का फैसला लिया गया। इस सर्जरी में न तो महिला की पसली तोड़नी पड़ी और न ज्यादा खून का बहाव हुआ।
सर्जरी के बाद महिला तेजी से स्वस्थ हो रही है। उसे सर्जरी के बाद होने वाले गंभीर दर्द से भी मुक्ति मिल गई है। सफदजंग अस्पताल में पहली बार सफल रोबोटिक कार्डियो-थोरेसिक सर्जरी हुई है। इस विधि की मदद से केवल तीन छेद़ से ही दिल का इलाज हो गया। सफदजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएल शेरवाल ने इसे मील का पत्थर बताया है।
सफदरजंग अस्पताल में कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी विभाग (सीटीवीएस) के प्रमुख डॉ. अनुभव गुप्ता ने बताया कि 10 सितंबर को मरीज अस्पताल में भर्ती हुई थी। मरीज की हालत को देखते हुए विभाग से डॉ खुशवंत, डॉ अजीत, एनेस्थीसिया से डॉ वीरेंद्र, डॉ इरा को टीम में शामिल किया गया। इनकी मदद से 17 सितंबर को पहली सफल रोबोटिक कार्डियो-थोरेसिक सर्जरी की गई। डॉ. गुप्ता ने कहा कि 54 साल की महिला माइस्थीनिया ग्रेविस से परेशान थी। दिल के पास थाइमेक्टोमी बढ़ रहा था।
महिला का शरीर सामान्य रूप से सर्जरी करने के लायक नहीं था। इसमें दिल के ऊपरी हिस्से की हड्डी को काटना पड़ता है। ऐसे में हमने रोबोट की मदद से सर्जरी करने का फैसला लिया गया। इसमें तीन पोट डाल कर दिल के पास जमा थाइमेक्टोमी को आसानी से निकाल दिया गया। महिला अब स्वस्थ है और मंगलवार को उसे अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है।
एम्स में भी नहीं हैँ यह सुविधा
रोबोटिक के माध्यम से सर्जरी की सुविधा एम्स सहित देश के बड़े सरकारी अस्पतालों में भी उपलब्ध नहीं है। इस सुविधा की मदद से मरीज को कम दर्द के साथ अच्छा इलाज मिल जाता है। साथ ही रिकवरी भी तेजी से होती है। सफदजंग अस्पताल में कुछ माह पहले ही यह सुविधा शुरू हुई है। देश के कुछ निजी अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है। इस माध्यम से सर्जरी के लिए 5 से 15 लाख रुपए तक खर्च करना पड़ता है, जबकि अस्पताल में यह सुविधा मुफ्त है।