उपराज्यपाल वीके सक्सेना और अरविंद केजरीवाल
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उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी (आप) और उसके नेताओं को दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा अदालत ने उन्हें एलजी के खिलाफ कथित मानहानिकारक कुछ ट्वीट्स को हटाने का भी निर्देश दिया है। जस्टिस अमित बंसल ने मंगलवार को अपने अंतरिम आदेश में आप नेता संजय सिंह, आतिशी और सौरभ भारद्वाज को यह निर्देश दिया है। सक्सेना ने आप नेताओं के खिलाफ अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने के लिए मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
सक्सेना की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी और मनिंदर सिंह ने दलील दी कि आप और उसके नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप स्पष्ट रूप से झूठे और मानहानिकारक हैं। उन्होंने कहा कि उक्त नेता अपने आरोपों को साबित करने के लिए सबूत दिखाने में सक्षम नहीं हैं और आरोपों को साबित करने के लिए उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेज अस्तित्वहीन और जाली हैं। जेठमलानी ने कोर्ट के समक्ष कहा, पार्टी के पदाधिकारी रोज आरोप लगाते हैं कि सक्सेना 1400 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल हैं। वे कोई नाम नहीं ले सकते लेकिन हम जानते हैं कि वे वीके सक्सेना का जिक्र कर रहे हैं।
नहीं कर सकते सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपना बचाव
जेठमलानी ने तर्क दिया कि ये आरोप एक उच्च सांविधानिक पदाधिकारी के खिलाफ लगाए जा रहे हैं जो सार्वजनिक रूप से सामने आकर बचाव नहीं कर सकते।
- याचिका में मांग की गई कि थी इन नेताओं के खिलाफ निषेधाज्ञा आदेश पारित किया जाए और उन्हें एलजी के खिलाफ आरोपों के संदर्भ में सभी ट्वीट, पोस्ट या वीडियो को हटाने का निर्देश दिया जाए।
भाजपा ने कहा-यह झूठ पर सत्य की जीत
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि उच्च न्यायालय की टिप्पणी ने अरविंद केजरीवाल के झूठ को बेनकाब कर दिया है। अदालत का यह निर्णय झूठ पर सत्य की जीत है।
आप असहमत, फैसले का करेगी अध्ययन
आम आदमी पार्टी ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से असहमति जताई है। आप ने कहा है कि वह अदालत के फैसले का अध्ययन करेगी, वकीलों से सलाह करेगी और फिर अगला कदम उठाएगी। आप नेता दुर्गेश पाठक ने कहा कि हम अदालत के आदेश से पूरी तरह और विनम्रता से असहमत हैं।
सत्यमेव जयते : सक्सेना
उच्च न्यायालय के फैसले के बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने ट्वीट किया सत्यमेव जयते।