साहब, मेरे बच्चों ने किसी का क्या बिगड़ा था, दंगाइयों को मेरे बच्चों को मारकर क्या मिला, इससे उनको क्या मिलने वाला है, क्या कोई मुझे बता सकता है...बात करते-करते बाबू खान की आंखों से टप-टप आंसू गिरने लगे, आज इंसान जानवर से भी बदतर हो गया है, कुछ लोगों के बहकावे में आकर दंगाइयों ने हमारे परिवार को खत्म ही कर दिया... बाबू खान अपनी बात खत्म वक्त फफककर रो रहे थे, जिनको बेहद मुश्किल से संभाला जा सका।
हिंसा के दौरान 26 फरवरी 2020 को दंगाइयों ने पुराने मुस्तफाबाद के रहने वाले दो सगे भाइयों आमिर खान (30) और हाशिम अली (19) की हत्या कर दी थी। बाद में दोनों के शव व उनकी बाइक को जलाकर नाले में फेंक दिया था। अगले दिन पुलिस को दोनों भाइयों के शव नाले से बरामद हुए थे। बीमार रहने वाले बाबू खान ने बताया कि अब वह सिर्फ अपने बच्चों के लिए जी रहे हैं। एक पिता के लिए इससे बड़ा गम क्या होगा कि उसने अपने एक नहीं दो-दो जवान बच्चों के जनाजों को कंधा दिया।
आमिर और हाशिम अपने परिवार के साथ गली नंबर-16/17, पुराना मुस्तफाबाद में रहते थे। इनके परिवार में पिता बाबू खान, मां असगरी बेगम, तीन भाई व तीन बहन हैं। आमिर शादशुदा था, उसके परिवार में पत्नी सबीना के अलावा दो बेटी अल्फीशा और अलीशा थीं। पति की मौत के समय सबीना तीन माह की गर्भवती थी। बाबू खान ने बताया कि आमिर व हाशिम की मां पिछले कुछ दिनों से गाजियाबाद अपने मायके गई हुई थीं।
आमिर के नाना की तबीयत खराब थी। आमिर व हाशिम अपने नाना को देखने गाजियाबाद चले गए, लेकिन उस बीच जिले में हिंसा हो गई। परिजनों के कहने पर दोनों गाजियाबाद ही रुके रहे। इस बीच 26 फरवरी की रात को दोनों अपनी बाइक से भागीरथी विहार होते हुए घर लौट रहे थे। इस बीच दंगाइयों ने भागरथी विहार नाले की पुलिया पर उनको रोक लिया। इसके बाद दोनों की बेरहमी से हत्या कर शव को जलाकर नाले में फेंक दिया गया। हत्या से पांच मिनट पहले ही हाशिम की परिवार से बात हुई थी, उसने कहा था कि वह घर के पास ही हैं और पांच मिनट में पहुंच जाएंगे।
इसके बाद उनके मोबाइल बंद हो गए। परिवार को शक हुआ तो रात को पीसीआर कॉल की गई। अगले दिन सुबह पुलिस को दोनों के शव नाले से बरामद हुए। बाबू खान ने बताया कि जब उसको बेटों की पहचान के लिए मोर्चरी बुलाया गया था तो उनकी हालत देखकर उसका कलेजा मुंह को आ गया। उनके शरीर की शायद ही कोई ऐसी हड्डी हो जिसे न तोड़ा गया हो।
वारदात के चंद दिनों बाद दिल्ली सरकार ने दोनों बेटों की मौत पर परिवार को दस-दस लाख रुपये दे दिए। बाबू ने बताया कि आमिर की मौत के बाद अगस्त में उसकी पत्नी सबीना ने एक बच्ची को जन्म दिया जो अब छह माह की हो गई है। आंखों में आंसू भरकर बाबू ने कहा कि अब उसका परिवार इन बच्चों के लिए ही जी रहा है। पुलिस से उसने गुजारिश की कि आरोपियों को इस मामले में जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए।
नागरिकता कानून के विरोध में पिछले साल फरवरी माह में उत्तर-पूर्वी जिला दंगे की आग में झुलस गया था। 24 से 26 फरवरी के बीच हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस के एक जवान समेत 53 लोगों की मौत हो गयी थी जबकि सैकड़ों लोग जख्मी हो गए थे। पुलिस ने सबूतों और तकनीक के आधार पर जांच करते हुए 755 केस दर्ज किए और इसमें अब तक 18 सौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
जैसे जैसे मामले की जांच आगे बढने लगी, आम आदमी पार्षद ताहिर हुसैन को हिंसा करवाने का आरोपी पाया गया। पुलिस ने ताहिर हुसैन के साथ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की।
हाल ही में दंगा मामले में यह आरोप लगे कि एक ही पक्ष के ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की गयी जिसका जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने इसे पूरी तरह से नकार दिया और कहा कि सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की गई। सबूतों और तकनीक के आधार पर जांच करते हुए सभी की गिरफ्तारी की गई।