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दंगों का दर्दः हरे हैं जख्म, कोई बताए...कुसूर क्या था

Fri, 19 Feb 2021 04:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • नागरिकता संशोधन कानून पर हुआ था उपद्रव, उजड़ गए थे कई घर
  • बीते साल 24 से 26 फरवरी के बीच दंगों की आग में झुलसी थी दिल्ली
  • 53 लोगों की हत्या के गम से उबर नहीं पा रहे हैं परिजन
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बीते साल इसी माह हुई थी दिल्ली में हिंसा... - फोटो : AmarUjala
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विस्तार
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यूं तो वक्त बड़े से बड़ा जख्म भर देता है, लेकिन दिल्ली दंगों का दर्द भुलाया नहीं जा सकता। उनके लिए तो खासतौर से, जिन्होंने आंखों के सामने अपनों का कत्ल होते देखा। जिन 53 लोगों की हत्या हुई वे किसी एक समुदाय से नहीं थे। दंगे के साल भर बाद भी वे यही सवाल कर रहे हैं कि उनका कसूर क्या था, उन्होंने किसका क्या बिगाड़ा था? दंगों का दर्द उजागर करती शुजात आलम और राजीव कुमार की रिपोर्ट.... 

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अंकित के बड़े भाई बोले, मोहल्ले से जुड़ी हैं छोटे की यादें, इसलिए छोड़ दिया ...
भैया मेरे भाई अंकित आईबी में जवान थे। उनके अचानक चले जाने से पूरा परिवार बुरी तरह टूट गया, मम्मी-पापा तो आज भी सदमे से नहीं उभर पाए हैं। छोटे की याद सताती थी, इसलिए हम सबने अपने मोहल्ले को ही छोड़ दिया है। अपना घर किराए पर उठा अब गाजियाबाद में किराएदार बन गया हूं। अब कभी-कभार पुरानी गलियों में जाना होता है, लेकिन बिना आंसू निकले वापस लौटना नहीं हो पाता..

बात करते-करते अकुंर शर्मा का गला भरा आया, जिनके छोटे भाई अंकित शर्मा की दंगाइयों ने दिल्ली दंगे में  25 फरवरी को बेरहमी से हत्या कर दी थी। परिवार के जख्म आज भी हरे हैं। अंकित का परिवार दिल्ली छोड़कर गाजियाबाद में शिफ्ट हो गया है। अंकित को याद कर उसके पड़ोसियों की भी आंखें भर जाती हैं।
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अंकित शर्मा परिवार के साथ गली नंबर-6, खजूरी खास (नजदीक चांदबाग पुलिया) में रहते थे। परिवार में पिता रविंदर कुमार, मां सुधा, एक बड़ा भाई अंकुर और एक बहन सोनम शर्मा है। दोनों भाई-बहन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। 25 फरवरी की सुबह अंकित ड्यूटी के लिए निकले थे। उस दिन जिले में नागरिता कानून को लेकर तनाव बना था। दिन में अंकित की अपने परिवार से बातचीत भी हुई थी। शाम के समय वह चांदबाग के पास पहुंचे तो दंगाइयों ने उन्हें घेरकर बेरहमी से हत्या कर दी। शव को चांदबाग की पुलिया पर नाले में फेंक दिया गया। अंकित का फोन बंद आने लगा तो परिजनों को शक हुआ। अगले दिन अंकित का शव नाले से बरामद हो गया। 

अंकुर ने बताया कि जैसे ही उसके माता-पिता को अंकित की मौत का पता चला वह गहरे सदमे में चले गए। मां तो रोते-रोते बेहोश हो गई। हिंसा में अंकित की मौत की खबर फैलते ही उनके घर पर मीडिया का जमावड़ा लग गया। शव को ठिकाने लगाने की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई। पुलिस ने क्षेत्रीय निगम पार्षद ताहिर हुसैन को अंकित का मुख्य आरोपी पाया। अंकुर ने बताया कि केंद्र व दिल्ली सरकार ने उसकी मौत के बाद बड़े-बड़े एलान किए। दिल्ली सरकार से एक करोड़ की आर्थिक मदद मिली, लेकिन नौकरी का वायदा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इसकी प्रक्रिया अभी चल रही है। अंकित की हत्या के बाद केंद्र सरकार ने भी कई वादे किए थे, लेकिन वह भी अभी अधूरे हैं।

अंकुर ने बताया कि केंद्र सरकार ने अंकित के नाम से उसके गांव इटावा-बुढ़ाना, मुजफ्फरनगर में एक सड़क का नामकरण कर दिया। इसके अलावा गांव के मेन गेट को भी अंकित के नाम से बनाया गया है। अंकुर ने बताया उसके माता-पिता दोनों बीमार रहते हैं। दोनों चाहते हैं कि अंकित की हत्या में शामिल लोगों को जल्द से जल्द सजा मिल जाए। 

बहकावे में आकर मेरे बेटों को मार डाला...

delhi violence - फोटो : जी पॉल
साहब, मेरे बच्चों ने किसी का क्या बिगड़ा था, दंगाइयों को मेरे बच्चों को मारकर क्या मिला, इससे उनको क्या मिलने वाला है, क्या कोई मुझे बता सकता है...बात करते-करते बाबू खान की आंखों से टप-टप आंसू गिरने लगे, आज इंसान जानवर से भी बदतर हो गया है, कुछ लोगों के बहकावे में आकर दंगाइयों ने हमारे परिवार को खत्म ही कर दिया... बाबू खान अपनी बात खत्म वक्त फफककर रो रहे थे, जिनको बेहद मुश्किल से संभाला जा सका।

हिंसा के दौरान 26 फरवरी 2020 को दंगाइयों ने पुराने मुस्तफाबाद के रहने वाले दो सगे भाइयों आमिर खान (30) और हाशिम अली (19) की हत्या कर दी थी। बाद में दोनों के शव व उनकी बाइक को जलाकर नाले में फेंक दिया था। अगले दिन पुलिस को दोनों भाइयों के शव नाले से बरामद हुए थे। बीमार रहने वाले बाबू खान ने बताया कि अब वह सिर्फ अपने बच्चों के लिए जी रहे हैं। एक पिता के लिए इससे बड़ा गम क्या होगा कि उसने अपने एक नहीं दो-दो जवान बच्चों के जनाजों को कंधा दिया।

आमिर और हाशिम अपने परिवार के साथ गली नंबर-16/17, पुराना मुस्तफाबाद में रहते थे। इनके परिवार में पिता बाबू खान, मां असगरी बेगम, तीन भाई व तीन बहन हैं। आमिर शादशुदा था, उसके परिवार में पत्नी सबीना के अलावा दो बेटी अल्फीशा और अलीशा थीं। पति की मौत के समय सबीना तीन माह की गर्भवती थी। बाबू खान ने बताया कि आमिर व हाशिम की मां पिछले कुछ दिनों से गाजियाबाद अपने मायके गई हुई थीं। 

आमिर के नाना की तबीयत खराब थी। आमिर व हाशिम अपने नाना को देखने गाजियाबाद चले गए, लेकिन उस बीच जिले में हिंसा हो गई। परिजनों के कहने पर दोनों गाजियाबाद ही रुके रहे। इस बीच 26 फरवरी की रात को दोनों अपनी बाइक से भागीरथी विहार होते हुए घर लौट रहे थे। इस बीच दंगाइयों ने भागरथी विहार नाले की पुलिया पर उनको रोक लिया। इसके बाद दोनों की बेरहमी से हत्या कर शव को जलाकर नाले में फेंक दिया गया। हत्या से पांच मिनट पहले ही हाशिम की परिवार से बात हुई थी, उसने कहा था कि वह घर के पास ही हैं और पांच मिनट में पहुंच जाएंगे।

इसके बाद उनके मोबाइल बंद हो गए। परिवार को शक हुआ तो रात को पीसीआर कॉल की गई। अगले दिन सुबह पुलिस को दोनों के शव नाले से बरामद हुए। बाबू खान ने बताया कि जब उसको बेटों की पहचान के लिए मोर्चरी बुलाया गया था तो उनकी हालत देखकर उसका कलेजा मुंह को आ गया। उनके शरीर की शायद ही कोई ऐसी हड्डी हो जिसे न तोड़ा गया हो।

वारदात के चंद दिनों बाद दिल्ली सरकार ने दोनों बेटों की मौत पर परिवार को दस-दस लाख रुपये दे दिए। बाबू ने बताया कि आमिर की मौत के बाद अगस्त में उसकी पत्नी सबीना ने एक बच्ची को जन्म दिया जो अब छह माह की हो गई है। आंखों में आंसू भरकर बाबू ने कहा कि अब उसका परिवार इन बच्चों के लिए ही जी रहा है। पुलिस से उसने गुजारिश की कि आरोपियों को इस मामले में जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए।
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अब तक हुई 18 सौ लोगों की गिरफ्तारी 

delhi violence - फोटो : जी पॉल
नागरिकता कानून के विरोध में पिछले साल फरवरी माह में उत्तर-पूर्वी जिला दंगे की आग में झुलस गया था। 24 से 26 फरवरी के बीच हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस के एक जवान समेत 53 लोगों की मौत हो गयी थी जबकि सैकड़ों लोग जख्मी हो गए थे। पुलिस ने सबूतों और तकनीक के आधार पर जांच करते हुए 755 केस दर्ज किए और इसमें अब तक 18 सौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 

जैसे जैसे मामले की जांच आगे बढने लगी, आम आदमी पार्षद ताहिर हुसैन को हिंसा करवाने का आरोपी पाया गया। पुलिस ने ताहिर हुसैन के साथ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की। 

हाल ही में दंगा मामले में यह आरोप लगे कि एक ही पक्ष के ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की गयी जिसका जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने इसे पूरी तरह से नकार दिया और कहा कि सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की गई। सबूतों और तकनीक के आधार पर जांच करते हुए सभी की गिरफ्तारी की गई। 
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