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गणतंत्र के प्रहरी: गरीबों को दिलाया स्वास्थ्य और शिक्षा का अधिकार, जारी है अधिकारों की लड़ाई

Sun, 24 Jan 2021 04:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा विजय सिंघल, नई दिल्ली
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अधिवक्ता अशोक अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
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स्वास्थ्य एवं शिक्षा हर नागरिक का अधिकार है। खासकर आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए महंगे अस्पतालों व स्कूलों में इलाज करवाना व शिक्षा दिलवाना एक सपने के समान था। सरकारी अस्पतालों व स्कूलों की हालत तो किसी से छिपी नहीं है, हालांकि दोनों ही आम लोगों का मौलिक अधिकार हैं।

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ऐसे लोगों के हक की लड़ाई के लिए अधिवक्ता अशोक अग्रवाल सामने आए और उन्होंने हाईकोर्ट व सर्वोच्च न्यायालय तक में उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ी और आज फाइव स्टार कहलाने वाले अस्पतालों में उन्हें निशुल्क चिकित्सा मिल रही है वहीं निजी स्कूलों में भी बच्चे निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

सोशल ज्युरिस्ट संस्था के जरिए अशोक अग्रवाल ने करीब 20 वर्ष पहले निशुल्क चिकित्सा व शिक्षा का अभियान शुरू किया जो आज भी जारी है। उनके प्रयास से लाखों लोग चिकित्सा पा चुके हैं तो गरीब बच्चें शिक्षा प्राप्त कर रहे है। अग्रवाल ने वर्ष 2002 में हाईकोर्ट में आम लोगों के अधिकारों की आवज उठाते हुए निजी अस्पतालों व निजी स्कूलों के खिलाफ याचिका दायर कर अदालत का ध्यान इस तरफ दिलवाया कि सरकार से सस्ती दरों पर भूमि लेकर ये आम जनता को लूट रहे है।
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तय नियमों के तहत उन्हें 25 प्रतिशत मरीजों को निशुल्क चिकित्सा देनी है और स्कूलों को भी 25 प्रतिशत दाखिले आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को देने हैं। इस याचिका के बाद निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया और सभी ने इसका जमकर विरोध किया।

अशोक अग्रवाल के तर्कों के आगे उनकी एक न चली। आखिर 15 नवंबर 2002 को अदालत के फैसले के बाद निजी अस्पतालों को 10 प्रतिशत बैड व 25 प्रति ओपीडी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित करने पड़े। इन अस्पतालों में मैक्स, बत्रा, फोर्टिस, गगांराम, सेंट स्टीफन, मूलचंद जैसे अस्पताल भी शामिल हैं जहां गरीब लोग जाने की सोच भी नहीं सकते थे। 

दिलाईं मुफ्त किताबें और वर्दी
अशोक अग्राल ने सरकार से सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले निजी स्कूलों में दाखिलों का मुद्दा उठाया। 20 जनवरी 2004 को सफलता मिली। अदालत के आदेश पर अब करीब 385 स्कूलों में निशुल्क शिक्षा ही नहीं मिल रही बल्कि बच्चों को पुस्तके व वर्दी तक मुफ्त मिल रही है। आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चे आम बच्चों के समान शिक्षा पर रहे है।

ऐसा नहीं है कि उन्होंने आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए लड़ाई लडी। निजी स्कूल मनचाहे तरीके से हर वर्ष फीस बढ़ा देते थे। अग्रवाल ने 1997 में हाईकोर्ट का ध्यान इस तरफ आकर्षित किया। अदालत ने पूर्व न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया।

कमेटी ने अपनी करीब 15 रिपोर्ट में 1071 निजी स्कूलों के खातों की जांच करने के बाद कहा कि उक्त स्कूल फंड किसी अन्य संस्था में स्थानांतरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि करीब 500 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। अदालत ने इन स्कूलों को बढ़ी फीस 6 प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने का आदेश जारी कर दिया।
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अशोक अग्रवाल का कहना है कि ऐसे लोगों को चिकित्सा व शिक्षा दिलवाने के अधिकार के लिए वे प्रयासरत हैं और लोगां को भी आगे आना चाहिए।

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