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वार्षिक और विकास शुल्क से अभिभावकों की जेब होगी ढीली, अपील करेगी दिल्ली सरकार

Wed, 02 Jun 2021 03:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा रश्मि शर्मा, नई दिल्ली

सार

  • अलग-अलग स्कूलों में कक्षा के हिसाब से तय होते हैं ये शुल्क
  • औसतन स्कूल वार्षिक शुल्क के रूप में एक से 10 हजार तक लेते हैं
  • अभिभावकों का कहना है कि कोरोना काल में फीस पड़ेगी भारी
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मनीष सिसोदिया - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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निजी गैर मान्यता प्राप्त स्कूल कोर्ट से राहत मिलने के बाद अब अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूलेंगे। कोरोना काल में यह शुल्क अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ेगी। स्कूल वार्षिक शुल्क के रुप में औसतन एक से 10 हजार और विकास शुल्क एक से पांच हजार तक लेते हैं। दोनों ही शुल्क वार्षिक लिए जाते हैं, लेकिन कुछ स्कूल इन्हें तीन-तीन माह के आधार पर भी लेते हैं। स्कूलों ने यह शुल्क अभिभावकों से लिए जाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। वहीं, इससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। 
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पीतमपुरा के एक नामी स्कूल में सातवीं में पढ़ने वाले बच्चे के अभिभावक आशुतोष कुमार ने कहा कि वह एक निजी कंपनी में काम करते हैं, जहां उन्हें जनवरी से 30 फीसदी काट कर सैलरी मिल रही है। खाने-पीने के दाम बढ़ने से गुजारा मुश्किल से हो पा रहा है। ऐसे में दो बच्चों का विकास  व वार्षिक शुल्क स्कूल में देना जेब पर काफी भारी हो जाएगा। 

एक अन्य अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उनका बेटा तीसरी कक्षा में व बेटी आठवीं कक्षा में पढ़ती है। जब से वार्षिक व विकास शुल्क देने की बात सुनी है तब से समझ नहीं आ रहा कि अचानक से 10-15 हजार रुपये की राशि का इंतजाम कैसे होगा। अब तक उनकी पत्नी भी ट्यूूशन पढ़ाती थी लेकिन कोरोना काल में अब वह भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में पहले ही आर्थिक तंगी शुरू हो चुकी है। अब यदि स्कूल ने बकाए के हिसाब से यह शुल्क मांगे तो और ज्यादा दिक्कत होगी। 
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दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम कहती हैं कि स्कूलों को छूट मिल गई है और अब वह शुल्क के नाम पर मुंहमांगा पैसा वसूलेंगे। कोरोना काल में बड़ी संख्या में लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कोर्ट ने इस आर्थिक तंगी की ओर ध्यान नहीं दिया है।  

महाराजा अग्रसेन स्कूल (नरेला) के प्रबंधक एम.पी सिंह कहते हैं कि एक साल से भी अधिक हो गया और स्कूल बंद हैं। बीते साल वार्षिक शुल्क और विकास शुल्क लेने से स्कूलों को रोक दिया गया था। स्कूल भी एक साल से आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। स्कूल बच्चों को ऑनलाइन कक्षाएं भी दे रहे हैं और गतिविधियों की कक्षाएं भी होती हैं। ऐसे में यह शुल्क लिया जाना जरूरी है। इससे शिक्षकों को वेतन देने में भी आसानी होगी। कई स्कूल अपने काफी शिक्षकों को सैलरी भी नहीं दे पा रहे हैं। 

किस स्कूल में कितना वार्षिक शुल्क व विकास शुल्क
बाल भारती स्कूल(पूसा रोड)

नर्सरी कक्षा
विकास शुल्क-840 रुपये प्रति माह
वार्षिक शुल्क-8000 रुपये प्रति माह
ग्यारवीं-बारहवीं कक्षा
विकास शुल्क- 860 रुपये प्रति माह
वार्षिक शुल्क-8000 रुपये प्रति माह

एएसएन इंटरनेशनल स्कूल(मयूर विहार)
नर्सरी कक्षा
वार्षिक शुल्क-4700 रुपये(त्रैमासिक)
विकास शुल्क-2800 रुपये(त्रैमासिक)

महाराजा अग्रसेन स्कूल( नरेला)
वार्षिक शुल्क-1850 रुपये(वार्षिक)
विकास शुल्क-1000-1500 रुपये(वार्षिक)

फैसले के खिलाफ अपील करेगी सरकार : सिसोदिया
दिल्ली सरकार ने कोर्ट के फैसले को रुकवाने के लिए जल्द ही अपील करेगी। उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने फेसबुक पर लिखा कि दिल्ली सरकार उच्च न्यायालय के फैसले से सहमत नहीं है कि महामारी के समय में प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से बढ़ी हुई फीस लें। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि जिस समय लोगों की नौकरियां और धंधे चौपट हैं। ऐसे में फीस का बढ़ा बोझ अभिभावक कैसे सहन कर पाऐंगे। सरकार इसके खिलाफ अपील कर इस फैसले को रुकवाने की अर्जी देगी।

उल्लेखनीय है कि शिक्षा निदेशालय ने बीते साल वार्षिक शुल्क व विकास शुल्क लेने पर रोक लगा दी थी। स्कूलों को केवल ट्यूशन फीस ही लेने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने रोक लगानेे वाले शिक्षा निदेशालय के आदेश को निरस्त कर दिया है।
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