उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जब भी व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाती है, तो मांगी गई सूचना में स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि मामले में याची की क्या रुचि है। अदालत ने राष्ट्रपति भवन में मल्टीटास्किंग स्टाफ के लिए की गई नियुक्तियों के संबंध में जानकारी मांगने में तथ्यों को छिपाने पर याचिकाकर्ता हरकिशन पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया।
न्यायमूर्ति प्रथिभा एम सिंह ने इस आशय का स्पष्टीकरण जारी किया कि यह देखते हुए कि 12 जनवरी को पारित एक फैसले की गलत तरीके से व्याख्या की जा रही थी।
अदालत ने कहा कि उनकी राय है कि जब भी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाती है, तो आवेदक का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। अदालत ने कहा मांगी गई जानकारी में रुचि का खुलासा जरूरी है ।
याचिकाकर्ता ने राष्ट्रपति भवन में मल्टीटास्किंग स्टाफ के लिए की गई नियुक्तियों के संबंध में सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी । अधिसूचना के संबंध में उसे उम्मीदवारों की कुल संख्या, परीक्षा केंद्र आदि उपलब्ध कराया गया था। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सभी चयनित उम्मीदवारों के व्यक्तिगत विवरण के संबंध में जानकारी देने से मना कर दिया गया था ।
व्यक्तिगत विवरण में आवासीय पते और चयनित उम्मीदवारों के पिता के नाम शामिल थे ।अदालत ने कहा कि सीआईसी के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की बेटी ने राष्ट्रपति भवन में मल्टी टास्किंग स्टाफ में नियुक्ति के लिए आवेदन भी किया था लेकिन याचिका में उसने इस तथ्य का जिक्र नहीं किया। अदालत ने कहा कि उम्मीदवारों के पिता और आवासीय पतों के नामों के संबंध में मांगी गई जानकारी पूरी तरह से आक्रामक थी।
अदालत ने कहा कि मांगी गई जानकारी आरटीआई कानून के तहत स्पष्ट रूप से संरक्षित है जिसमें यह प्रावधान किया गया था कि ऐसी कोई भी जानकारी जो व्यक्तिगत जानकारी है वह व्यक्तियों की गोपनीयता को भंग करती है।अदालत ने याचिका खारिज करते हुए उस पर तथ्यों को छुपाने पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया।