हाईकोर्ट ने कोरोना के चलते वीडियों कांफ्रेंसिंग के दौरान कुछ वकीलों के पार्क या सीढ़ियों में बैठकर सुनवाई में शामिल होने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि वकीलों के इस प्रकार के रवैये पर हैरानी है। अदालत ने कहा उनकी आवाज सही से नहीं आने पर कार्यवाही का संचालन करना बहुत कठिन हो जाता है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह ने कुछ मामलों का हवाला देते हुए कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंस के नियमों के मुताबिक वकील और सभी पक्षों से किसी शांत स्थल से सुनवाई में शामिल होने की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने कहा कि ऐसे स्थल पर सुनवाई में शामिल न होने पर भले ही उनकी फोटो साफ ना आए लेकिन आवाज स्पष्ट आए। अदालत ने कमजोर इंटरनेट कनेक्शन और सही जगह से वकीलों के दलीलें नहीं रखने के कारण डिजिटल तरीके से सुनवाई के दौरान अक्सर होने वाली बाधा पर नाराजगी जतायी।
उन्होंने कहा कि इस तरह कार्यवाही चलाना बहुत मुश्किल हो जाता है। पिछले 45 मिनट से मैं केवल एक मामला सुन पायी हूं क्योंकि वकील की आवाज ही नहीं आ रही। आधा समय तो वकीलों को जवाब देने में चला जाता है जो बार-बार पूछते हैं कि क्या मेरी आवाज आ रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह एक नोट जारी करेंगी कि वकील अगर ऐसी जगह पर हैं जहां से आवाज सही से नहीं आती है तो उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।उन्होंने कहा वकील सड़क पर जाते हुए, पार्क में बैठकर या सीढ़ियों पर चलते हुए सुनवाई में हिस्सा लेते हैं या दलीलें रखते हैं। यह आश्चर्यजनक है। आपको वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के नियमों का पालन करना चाहिए।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने अदालत के मत से सहमति जताते हुए कहा कि वकीलों को डिजिटल तरीके से सुनवाई में उचित व्यवस्था के साथ हिस्सा लेना चाहिए। वहीं अधिवक्ता जयंत मेहता ने भी सुनवाई में हिस्सा लेने वाले कुछ वकीलों के इस तरह के व्यवहार को असम्मानजनक बताया और कहा कि वह अदालत के संदेश को वकीलों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।