ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर करने के लिए दिल्ली सरकार ने अपने निगरानी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ऑक्सीजन निर्माताओं से लेकर अस्पताल पहुंचने तक की स्थिति का अब हर दो घंटे पर सरकार अपडेट लेगी। इस बीच हर अस्पताल को अपने यहां ऑक्सीजन की उपलब्धता की जानकारी भी देनी होगी। इसके लिए एक विशेष पोर्टल भी बनाया गया है। ऑक्सीजन की कमी की बात मानते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस सिस्टम के जरिए जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन को अस्पतालों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
अरविंद केजरीवाल के मुताबिक, ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए उसका बेहतर प्रबंधन करना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार ने ठोस कदम उठाया है। इसके लिए एक पोर्टल बनाया जा रहा है। वहीं, ऑक्सीजन निर्माताओं से लेकर आपूर्तिकताओं व अस्पताल प्रशासन को हर दो घंटे में ऑक्सीजन की स्थिति बतानी होगी। निर्माता बताएगा कि पिछले 2 घंटे के अंदर उनके यहां से कितने ट्रक निकली। इसी तरह आपूर्तिकर्ता को बताना पड़ेगा कि उसके कितने ट्रक दिल्ली की तरफ जा रहे हैं। अस्पतालों को भी बताना पड़ेगा कि पिछले 2 घंटे में ऑक्सीजन कितनी इस्तेमाल हो गई और कितनी बच गई है। इससे दिल्ली सरकार को तकरीबन रीयल टाइम बेसिस पता रहेगा कि कहां पर ऑक्सीजन की कमी आने वाली है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली को 490 टन ऑक्सीजन आवंटित किया है। जबकि जरूरत 700 टन की है। बावजूद इसके आबंटित ऑक्सीजन भी पूरी नहीं पहुंच पा रही है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी का बहुत बड़ा कारण है। जगह-जगह से जो ऑक्सीजन आनी है, वह ऑक्सीजन दिल्ली के अंदर पहुंच नहीं रही है। दिल्ली में जगह-जगह अस्पतालों में ऑक्सीजन की जो कमी महसूस हो रही है, उसका यह बहुत बड़ा कारण है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई के आने वाले दिनों में दिक्कत दूर होगी।
केंद्र सरकार से मिल रहा है काफी सहयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से काफी सहयोग मिल रहा है। कल भी पूरा दिन केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों के साथ अधिकारियों की टीम बैठी रही। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की दोनों टीमें मिल कर अच्छे से काम कर रही हैं और कोशिश की जा रही है कि जो भी सप्लाई आने में दिक्कत हो रही है, उसको दूर किया जा सके। बहुत ज्यादा अफरा-तफरी का आलम है, यह ठीक हो जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से तो हमें मदद मिल ही रही है और भी जहां से भी हम लोगों को ऑक्सीजन मिल सके, ऑक्सीजन के टैंकर मिल सके, पूरे देश से और दुनिया भर से हम प्राप्त करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। यह जो इतनी बड़ी इमरजेंसी बन गई है, इससे हम लोगों को जल्द छुटकारा मिलेगा।
दिल्ली सरकार ने खारिज किए आरोप
दिल्ली सरकार ने कहा कि दिल्ली में, 8 में से 7 संयंत्रों को दिल्ली सरकार के अस्पतालों में और एक को केंद्र सरकार के अस्पताल सफदरजंग में स्थापित किया जाना था। केंद्र सरकार के साथ कई बार बात करने के बाद मार्च 2019 के शुरू में 5 अस्पतालों के लिए प्लांट शुरू होने थे, हालांकि, एक बार फिर, ठेकेदार गैर जिम्मेदार पाया गया और केंद्र के साथ कई बार बात करने के बाद 5 संयंत्रों में से केवल एक को ही आज तक चालू किया गया है।
केंद्र प्लांट लगाने में देरी का कारण दिल्ली सरकार से साइट प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने को बता रहा है। हालांकि यह कभी भी दिल्ली सरकार के संज्ञान में नहीं लाया गया है और यह पूरी तरह से झूठ है। यहां तक कि अभी तक केंद्र सरकार के सफदरजंग अस्पताल में भी प्लांट चालू नहीं किया गया है।
सिसोदिया की अपील- ऑक्सीजन की कमी पर बेवजह चेतावनी संदेश न दें अस्पताल
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अस्पतालों से अपील करते हुए कहा है कि वे बिना वजह ऑक्सीजन की कमी को लेकर चेतावनी संदेश न दें। उन्होंने मीडिया से भी इस बात की अपील की है कि खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की सत्यता जांच कर लें।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस तरह के कदमों से उन अस्पतालों को मदद देने की कोशिश प्रभावित होती है, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है।एक घटना का जिक्र करते हुए सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली के एक छोटे अस्पताल ने ऑक्सीजन की कमी का हवाला दिया, लेकिन बाद में पता चला कि उसके पास 30 सिलिंडर है, जिनमें से 20 सिलिंडर का अभी इस्तेमाल किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि अस्पताल जरूरत के हिसाब से ही ऑक्सीजन की मांग करें।