ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन का जब पहला मामला आया था तो विशेषज्ञों का कहना था कि यह काफी खतरनाक साबित हो सकता है। एहतियात के तौर पर कई देशों ने ब्रिटेन से आने वाली उड़ानों पर प्रतिबंध भी लगा दिया था। अनुमान लगाया जा रहा था कि वायरस का नया स्ट्रेन तेजी से फैलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राजधानी में इस वायरस से पीड़ित अधिकतर मरीजों में संक्रमण के काफी हल्के लक्षण मिले और इसका ज्यादा प्रसार भी नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की ओर से उठाए गए महत्वपूर्ण कदम और जन सहभागिता से कोरोना के नए स्ट्रेन पर काबू पाया गया है।
ब्रिटेन से लौटे लोगों में संक्रमण की पहचान के लिए दिल्ली सरकार ने घर-घर जांच अभियान चलाया। इनके तहत चार हजार से ज्यादा लोगों की ट्रेसिंग की गई। संक्रमितों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। साथ ही उनके परिजनों की भी जांच की गई। इसके अलावा सरकार ने दिल्ली एयरपोर्ट पर भी मरीजों के लिए जांच की सुविधा शुरू की। संक्रमितों को तुरंत आइसोलेशन केंद्र और लोकनायक अस्पताल में भर्ती कराया जाता था। लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि नए स्ट्रेन से पीड़ित अधिकतर मरीजों में संक्रमण के हल्के लक्षण मिले थे।
संक्रमितों में सिर्फ चार मरीजों को ही आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत पड़ी थी। इससे कहा जा सकता है कि वायरस का नया रूप घातक नहीं है। डॉक्टर सुरेश ने कहा कि 10 माह से कोरोना मरीजों का इलाज करने से नये प्रकार से पीड़ित मरीजों का उपचार करने में भी लाभ मिला। यही कारण है कि इन मरीजों में किसी की मौत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में संक्रमण अब काफी धीमा हो गया है। बीते एक सप्ताह में नए स्टेन से पीड़ित एक भी मरीज को अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है।
शालीमार बाग के फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर विकास मौर्य ने बताया कि वायरस का यह रूप इतना घातक था कि ब्रिटेन में लॉकडाउन लगाना पड़ा था। हालांकि देश में इसका ज्यादा प्रभाव नहीं हुआ है। इसका एक कारण यह हो सकता है कि अब नया स्ट्रेन पहले की तरह बर्ताव न कर रहा हो। इसलिए ही यह अधिक तेजी से नहीं फैला। वहीं, सरकार ने भी वायरस के इस रूप को लेकर काफी सतर्कता बरती।