पिछले दो महीन में लोगों ने कोरोना का भयावह रूप देखा। लाखों संक्रमित हुए और हजारों की मौत हो गई। मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए भी यह महामारी खतरनाक साबित हुई, जो मनोरोगी स्वस्थ होने लगे थे। अब उनकी हालत पहले के मुकाबले काफी खराब हो गई है। कई रोगियों को अस्पताल में भी भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। इससे डॉक्टरों कि चिंता बढ़ गई है। मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक परेशानियों से ठीक हो रहे लोगों के लक्षण दोबारा से गंभीर हो गए हैं। इसका एक बड़ा कारण कोरोना के दौर में हुई छाई अनिश्चितता और असुरक्षा का माहौल है।
इहबास (मानव व्यवहार व संबद्ध विज्ञान संस्थान) के निदेशक डॉ. निमेष देसाई ने बताया कि उनके अस्पताल में रोजाना औसतन 600 से 700 मरीजों को ओपीडी में देखा जा रहा है। इनमें से कई रोगियों का स्वास्थ्य ठीक हो रहा था, लेकिन जब से कोरोना से हालात खराब हुए तो इन मरीजों कि मानसिक स्थिति भी बिगड़ गई। खासकर उन रोगियों पर ज्यादा प्रभाव पड़ा है जो कोरोना से भी संक्रमित हो गए थे।
डॉ. देसाई बताते है कि संक्रमित हुए लोगों के मानसिक लक्षण पहले के मुकाबले बढ़ने लगे हैं। हालात ऐसे है कि जो मरीज पहले स्वस्थ हो रहे थे, उन्हें भी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में भी अस्पताल में मरीजों की पूरी तरह देखरेख कि गई, क्योकि सही समय पर इलाज न मिलने से गंभीर परिणाम हो सकते थे।
वरिष्ठ मनोरोग चिकित्सक डॉ. राजकुमार श्रीनिवास बताते है कोविड के दौरान लोगों का मानसिक स्वास्थ्य एक चिंता का विषय है और उनके पास क़रीब 50-60 प्रतिशत ऐसे मामले आ रहे हैं जहां लोग अकेलापन, घबराहट, नींद न आना एकाग्रता की कमी महसूस कर रहे हैं। वह कहते हैं कि कोविड की वजह से अनिश्चितता का माहौल है। रोज नए आंकडे आते हैं, नए मामले सामने आ रहे है और अभी तक इसका कोई पुख़्ता इलाज सामने नहीं आया है, तो लोगों के मन में दहशत बैठी हुई है। यही कारण है कि पहले से मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों की बीमारी अब गंभीर हो रही है। इससे भविष्य में भयावह स्थिति बन सकती है।
सामान्य लोगों को भी हो रही परेशानी
इहबास के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर ओमप्रकाश ने बताया कि उनके पास कई ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिन्हें कोरोना से स्वस्थ होने के बाद कुछ मानसिक परेशानियां होने लगी है। इनम रोगियों में सबसे प्रमुख लक्षण तनाव, घबराहट और चिंता का है।यह लोग कोरोना से तो स्वस्थ हो गए हैं, लेकिन इनमें मनोरोग के लक्षण देखे जा रहे हैं, जो एक चिंता का विषय है।
ऐसे पाया जा सकता है काबू
डॉक्टर ओमप्रकाश की सलाह है कि मानसिक अवसाद जैसी बीमारी पर काबू पाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है सकारात्मक सोच रखना सोच रखना। लोगों को सोचना होगा कि इस संकट में वह अकेले नहीं हैं। किसी भी समस्या के बारे में लोगों को अपने परिवार वालों से खुलकर बात करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर आंख मूंदकर भरोसा करना छोड़ना होगा। किसी भी बीमारी के लिए डाक्टरों पर ही भरोसा करना होगा। सही समय पर पूरी नींद लेनी होगी। योग और प्राणायाम का भी सहारा लेना चाहिए। किसी भी शंका की स्थिति में डाक्टरों और मानसिक रोग विशेषज्ञों की सलाह लेने से हिचकिचाना नहीं चाहिए।
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