दिल्ली के स्कूल और कॉलेजों की बिल्डिंग सबसे अधिक प्रदूषित हैं। इसके अलावा रेस्टोरेंट और अस्पतालों व सिनेमाहॉल में भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों से 2 से 5 गुना अधिक प्रदूषित हवा है। यह खुलासा आईआईटी दिल्ली के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रिसर्च ऑन क्लीन एयर, सोसायटी फॉर इंडोर इंवायरमेंट द्वारा राजधानी के 37 भवनों में 15 अक्तूबर 2020 से 30 जनवरी 2021 तक की स्टडी में किया है।
आईआईटी दिल्ली प्रबंधन के मुताबिक, स्टडी में दिल्ली के 37 भवनों को शामिल किया गया था। इसमें स्कूल, कॉलेज, रेस्टोरेंट,ऑफिस, अस्पताल, शापिंग मॉल,मॉल, सिनेमा हाल आदि को शामिल किया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली दुनिया के टॉप 20 प्रदूषित शहरों में से एक हैं। हालांकि प्रदूषण के लिए अक्सर बाहर के वातावरण को दोषी ठहराया जाता है। घर, ऑफिस या स्कूल आदि में हम अपने जीवन में 80 से 90 फीसदी समय व्यतीत करते हैं। ऐसे ही कारणों को जानने के लिए भवनों के अंदर प्रदूषण मानकों की जांच की गई।
अत्यधिक लोग और हवादार न होना बड़ा कारण
स्कूल, कॉलेज, आफिस, अस्पतालों आदि में प्रदूषण का बड़ा कारण अत्यधिक लोग और हवादार न होना है। भवनों का डिजाइन ऐसा है, जिसमें ताजा हवा के आने और अंदर की हवा बाहर जाने के लिए कोई खास इंतजाम या डिजाइन नहीं किए गए हैं। इन भवनों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों से 2 से 5 गुना अधिक और डब्ल्यूएसचओ के मानकों से 10 से 15 गुना अधिक प्रदूषित है। यहां पर पीएम 2.5 का लेवल अत्यधिक खतरनाक स्तर पर था। यह सेहत के सबसे अधिक नुकसानदायक है। तंबाकु और सिगरेट का खुलेआम प्रयोग किया जाता है। इसके चलते भी प्रदूषण में इजाफा होता है।
खाना बनाने का तेल और कैमिकल से सफाई भी कारक
स्टडी में सामने आया है कि रेस्टोरेंट और हॉस्पिटल में प्रदूषण बढ़ाने में खाना बनाने का तेल और सफाई के लिए कैमिकल का प्रयोग भी यहां प्रदूषण का बड़ा कारक है। यहां पर कार्बनडाइआक्साइड का लेबल भी अत्यधिक था।
कुछ स्कूलों में पेड़-पौधों केचलते हालात ठीक:
कुछ स्कूल और कॉलेजों ने हवादार कमरों के अलावा कैंपस में पेड़-पौधे लगा रखे हैं। कमरों की ठीक से सफाई होती है। इसके चलते यहां प्रदूषण का स्तर अन्य के मुकाबले बेहतर दिखा। हालांकि अभी सुधार की जरूरत है।
सुझाव:
स्कूल, कॉलेज और भवनों की साफ-सफाई पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। नियमित सफाई केसाथ बारीक कणों को हटाना भी जरूरी है। इसके अलावा हवा के आने-जाने के लिए सही व्यवस्था को करवाया जाए। दीवारों, गलियारों, शोचालय आदि की सफाई पर भी ध्यान देना होगा। तंबाकू और सिगरेट पूरी तरह से भवन के अंदर प्रतिबंधित होना चाहिए।