हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में सजा पाए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को अधिकांश सजा काटने के बावजूद जेल से रिहा न करने पर हैरानी जताई है। अदालत ने कहा कि इस मामले में खंडपीठ के आदेश को भी तामिल नहीं किया गया। अदालत ने चौटाला को रिहा करने के मामले में दायर याचिका को सुनवाई के लिए खंडपीठ के समक्ष स्थानांतरित कर दिया। इतना ही नहीं अदालत ने चौटाला की अंतरिम जमानत भी 23 फरवरी तक बढ़ा दी।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना के समक्ष ओपी चौटाला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरि हरन व अमित साहनी ने बताया कि दिसंबर 2019 को खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को महात्मा गांधी के 150 वें जन्म दिवस पर कैदियों को मिलने वाली छूट का लाभ देने को कहा था। अदालत ने कहा था कि 86 वर्षीय चौटाला भ्रष्टाचार के आरोप में मिली सात वर्ष की सजा को पूरी कर चुका है।
अमित साहनी ने अदालत को बताया कि दिल्ली सरकार ने सजा में इस आधार पर छूट से इनकार कर दिया कि चौटाला को आपराधिक षड्यंत्र के मामले में 10 वर्ष की सजा मिली हुई है। उन्होंने कहा कि खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के इस तर्क को खारिज करते हुए अपने निर्णय पर पुनर्विचार का आदेश दिया था।
उन्होंने कहा कि इसके बाद कई बार दिल्ली सरकार को ज्ञापन देकर चौटाला को रिहा करने का आग्रह किया गया लेकिन सरकार ने कोई जवाब तक नहीं दिया। ऐसे में दिल्ली सरकार को खंडपीठ के आदेश के तहत चौटाला को रिहा करने का निर्देश दिया जाए।
उन्होंने कहा कि महिला व ट्रांसजेंडर कैदियों को 55 वर्ष की आयु के बाद सजा में विशेष छूट का प्रावधान है जबकि पुरुष कैदियों को 60 वर्ष की आयु के बाद सजा में छूट का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि उनका मुवक्किल विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त होने के अलावा स्थाई रूप से 60 प्रतिशत विकलांग है। इसके अलावा वह सात वर्ष से ज्यादा की सजा काट चुका है। ऐसे में वह इस विशेष छूट पाने का हकदार है।
अत: दिल्ली सरकार को उनको रिहा करने का निर्देश दिया जाए। न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि चौटाला को रिहा करने का आदेश दो सदस्यीय खंडपीठ ने दिया था ऐसे में उनके समक्ष ही याचिका पर सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के पास याचिका स्थानांतरित करते हुए उनसे उचित खंडपीठ के समक्ष सुनवाई 23 फरवरी को करवाने का आग्रह किया है।