कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के डीजल-पेट्रोल की महंगाई, जीएसटी और ई-वे बिल के खिलाफ भारत बंद के आह्वान को शुक्रवार को अधिकतर व्यापारियों ने ठुकरा दिया। व्यापारियों ने कहा कि कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के चलते पहले ही व्यवसाय चौपट होने की कगार पर है। ऐसे में किसी भी तरह का आंदोलन व्यापारियों के हित में नहीं है। कई बाजारों में इक्का-दुक्का दुकानें जरूर बंद थीं, लेकिन कनॉट प्लेस, करोल बाग, गोल मार्केट, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार व सदर बाजार आदि में दिनभर रौनक बरकरार थी।
सीएआईटी के बंद के आह्वान के बाद बृहस्पतिवार देर शाम दिल्ली के लगभग दर्जनभर बड़े बाजारों के व्यापारिक संगठनों ने बैठक की थी। इसमें कनॉट प्लेस, जनपथ, करोल बाग, खान मार्केट, चांदनी चौक, गफ्फार मार्केट, टैंक रोड थोक कपड़ा मार्केट, लाजपत नगर, ग्रीन पार्क, साउथ एक्सटेंशन पार्ट-1 व पार्ट-2, अरविंदो मार्केट, जीके-1 व 2 की मार्केट एसोसिएशनों के पदाधिकारी पहुंचे। इसमें निर्णय लिया गया था कि वे सीएआईटी की मांगों का समर्थन करेंगे, लेकिन शुक्रवार को दुकानें नहीं बंद रखेंगे। व्यापारियों ने कहा कि वे अपनी परेशानियों को लेकर जीएसटी काउंसिल के साथ संवाद करेंगे और संबंधित सरकारी निकाय से मिलकर समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
सदर बाजार-चावड़ी बाजार में खरीदारी सामान्य
सदर बाजार और चावड़ी बाजार में सीएआईटी के बंद के आह्वान का कोई असर नहीं था। शुक्रवार को यहां सामानों की खरीदारी और लोडिंग का काम दिनभर जारी था। सदर बाजार मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने कहा कि दिल्ली के बाजारों में एक प्रतिशत दुकानें बंद थीं। यहां तक कि चावड़ी बाजार में जहां सीएआईटी ने मंच लगाया था, वहां तो कुछ दुकानें बंद थीं, लेकिन आसपास की गलियों की दुकानें यहां भी खुली थीं।
बाजारों ने किया बंद का समर्थन पर दुकानें खोले रखीं : सीएआईटी
सीएआईटी ने कहा है कि शुक्रवार को दिल्ली के लगभग सभी बाजारों ने जीएसटी, डीजल-पेट्रोल के बढ़े दाम और ई-वे बिल के खिलाफ उनके भारत व्यापार बंद का समर्थन किया, लेकिन दुकानें खोले रखीं। सीएआईटी के मुताबिक, भारत बंद के दौरान देशभर में लगभग 1500 जगहों पर धरना दिया गया, जिसमें व्यापारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चैंबर ऑफ ट्रेड इंडस्ट्री के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली के अधिकतर बाजार खुले हुए थे, लेकिन मार्केट एसोसिएशनों ने आंतरिक तौर पर बंद का समर्थन किया। किसी भी दुकानदार पर बंद के लिए दबाव नहीं डाला गया था।