कोरोना संक्रमण के कारण शादी समारोह से जुड़े कारोबार को करोड़ों का नुकसान हुआ है। नियमों में सख्ती के कारण राजधानी में गूंजने वाली शहनाई पड़ोसी राज्यों में गूंज रही है। अनलॉक-5 में दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने बैंक्वेट हॉल कारोबारियों को 50 फीसदी क्षमता के साथ खोलने की छूट दी है, लेकिन इससे वह संतुष्ट नहीं हैं।
उनका कहना है कि डीडीएमए के इस निर्देश से उन्हें कोई खास राहत नहीं मिलेगी। क्योंकि, अब उनके पास कोई बुकिंग नहीं है। अप्रैल, मई से अब तक शादियों का सीजन था, परंतु इस अवधि में सभी बैंक्वेट हॉल, फार्म हाउस और रिसोर्ट बंद रहे। अब 18 जुलाई तक शुभ मुहूर्त तो है, लेकिन कोई शादी करने वाला नहीं है। अब अगली बुकिंग नवंबर की होगी, तब कहीं राहत की उम्मीद है।
फिलहाल करा दी साफ-सफाई
रविवार को कारोबारियों ने बैंक्वेट हॉल की साफ-सफाई कराई और पहले बुकिंग के लिए आए लोगों से संपर्क साधने की कोशिश की। मां जगदंबा बैंक्वेट पीतमपुरा के मालिक नवीन ने बताया कि ज्यादातर लोग जिन्होंने पहले दिल्ली में शादी करने की योजना बनाई थी, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी उन्होंने शादी की तारीख नहीं टाली, बल्कि गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे शहरों में जाकर शादी कर ली। अब तमाम बैंक्वेट हॉल कारोबारियों को लोगों से लिया एडवांस लौटाने का दोहरा दबाव बढ़ गया है।
एडवांस लौटाना पड़ रहा वापस
बाहरी दिल्ली के मैरिज लॉन के मालिक गगन सिंह ने बताया कि डीडीएमए की गाइडलाइन में यह कहा गया है कि शादियों के लिए जिन लोगों ने एडवांस दिया है, उन्हें शादी स्थगित करनी पड़ी है, उनका एडवांस लौटाया जाएगा। बैंक्वेट हॉल कारोबारी एडवांस का सेटलमेंट करना चाहते थे। उनकी इच्छा थी कि उसी एडवांस बुकिंग पर लोग उन्हीं के यहां बाद में कार्यक्रम करते तो उनका भी भला हो जाता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। करीब 90 फीसदी लोगों ने दिल्ली से बाहर जाकर शादी कर ली। अब बैंक्वेट हॉल कारोबारियों को उनका एडवांस लौटाना पड़ रहा है।
आमदनी शून्य, खर्चे ज्यों के त्यों
बैंक्वेट हॉल कारोबारियों ने बताया कि पिछले दो साल से उनकी लागत का पैसा भी नहीं निकल रहा है। सरकार की तरफ से उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स, बार लाइसेंस व दूसरे कई लाइसेंस की फीस और बिजली के बिल में कोई छूट नहीं मिल रही है। सालभर से उनका लाखों रुपया यूं ही खर्च हो रहा है। इसके अलावा रखरखाव और अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह देनी पड़ रही है। कारोबारियों का मानना है अगर ऐसे ही हालात रहे तो दिल्ली में सैकड़ों बैंक्वेट हॉल मालिक दूसरा कारोबार करने पर मजबूर हो जाएंगे। काफी बैंक्वेट हॉल अभी भी बंद होने की कगार पर हैं।
दूसरे कारोबार का करना पड़ेगा रुख
बैंक्वेट हॉल एसोसिएशन से जुड़े एक कारोबारी ने बताया कि दिल्ली में करीब 1200 फार्म हाउस, रिसोर्ट, बैंक्वेट हॉल हैं। इनसे हजारों लोग हुड़े हुए हैं। कैटरिंग, बैंडबाजा, फूल वाले, टैंट वाले, फल वाले आदि लोग बेरोजगार हो गए हैं। एक बुकिंग से पहले बैंक्वेट हॉल मालिक करीब 25 फीसदी रकम एडवांस लेते हैं, जो अब उन्हें लौटानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा ही चला तो वे बेहाल हो जाएंगे और उन्हें दूसरे कारोबार का रुख करना पड़ेगा।