राजधानी में अब वन्यजीवों के प्राणों की रक्षा करने के लिए दिल्ली सरकार के वन विभाग की एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ती हुई नजर आएगी। यह न सिर्फ घायल वन्यजीवों का उपचार करेगी बल्कि उनकी गंभीर हालत होने पर दक्षिणी दिल्ली के रेस्क्यू सेंटर में उपचार के लिए पहुंचाएगी। इस संबंध में वन विभाग की ओर से लगभग तैयारियां पूरी हो गई हैं। उम्मीद है कि कुछ महीनों के इंतजार के बाद यह एंबुलेंस सड़कों पर दिखने लगेगी।
वन विभाग के एक वरिष्ठ आधिकारी ने दावा किया कि यह एंबुलेंस दिल्ली में पहली तरह की सरकारी एंबुलेंस रहेगी। इसमें वन्यजीवों के लिए ऑक्सीजन, दवाईयां, फर्स्ट एड किट समेत अन्य उपकरण शामिल रहेंगे। अभी कुछ एनजीओ की ओर से दिल्ली में एंबुलेंस की सेवा मिलती है। अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य में सिर्फ कुछ महीने का इंतजार है। इसके बाद एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ने लगेगी।
टोल फ्री नंबर से मिलेगी मदद
दिल्ली में किसी भी स्थान पर घायल जानवर मिलने पर लोग वन विभाग की टोल फ्री नंबर से मदद ले सकेंगे। वन विभाग की ग्रीन हेल्पलाइन नंबर 1800118600 पर ही मदद मांग सकते हैं। हालांकि, विभाग की ओर से वन्यजीवों के लिए जल्द ही एक नया हेल्पलाइन नंबर भी आने की संभावना है। इसके लिए विभाग की ओर से प्रस्ताव भी तैयार किया गया है, जोकि प्रक्रिया में चल रहा है।
एंबुलेंस में मौजूद रहेंगे चिकित्सा व अन्य कर्मी
विभाग की ओर से चलने वाली एंबुलेंस सेवा में चिकित्साकर्मी मौजूद रहेंगे। घायल जानवरों के इलाज करने के लिए गाड़ी में वेटेरनरी डॉक्टर, कंपाउंडर व फोरेस्ट गार्ड भी शामिल रहेंगे। कॉल मिलने पर एंबुलेंस मौकेे पर पहुंच घायल जानवर का इलाज करेगी। वहीं, जानवर की गंभीर हालत होने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारी का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अभी एक ही एंबुलेंस सड़क पर उतरेगी। जरूरत पड़ने पर इसकी संख्या में इजाफा भी किया जा सकता है।
दक्षिणी दिल्ली में किया जाएगा रेस्क्यू
सड़कों से घायल मिलने वाले पशुओं को दक्षिणी दिल्ली स्थित रेस्क्यू सेंटर में उपचार किया जाएगा। यहां पशुओं के लिए विभाग की ओर से केंद्र बना हुआ है जोकि पूरी दिल्ली में एकलौता केंद्र है। हाल ही में यहां नीलगाय की पैर की टूटी हड्डी की सर्जरी कर लोहे की प्लेट से जोड़ा गया था जोकि विभाग की ओर से पहली ऐसी सर्जरी हुई थी।