आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रो. वी. रामगोपाल राव बताते हैं कि मार्च-2020 से लेकर अब तक नियमित ऑफिस में जाकर काम कर रहे थे। उनकी पत्नी डॉ. अनुपमा राव दिल्ली के अस्पतालों में कोरोना समेत अन्य मरीजों का इलाज कर रही हैं। एक साल तो ठीक निकल गया, पर अचानक 25 मार्च को पत्नी को लक्षण दिखे तो जांच कराई। रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद घर में मौजूद पांच सदस्यों (दो गेस्ट) ने जांच कराई तो सब संक्रमित मिले।
कोरोना संक्रमित होने की खबर सदमे जैसी होती है। वे बताते हैं कि हमने घबराने की बजाय घर पर ही समय से कोरोना में प्रयोग होने वाली सामान्य दवा लेनी शुरू कर दी। योग, व्यायाम, पौष्टिक आहार के अलावा समय पर ऑक्सीजन, बीपी, शुगर की जांच करते रहे। 17 दिन बाद कोरोना को मात देकर पूरा परिवार पुरानी दिनचर्या पर लौट आया। उनके मुताबिक, मेरा मानना है कि आधे से अधिक मरीज घर में ही ठीक हो सकते हैं। बशर्ते लक्षण दिखते ही जांच और रिपोर्ट के आधार पर दवा शुरू कर दें।
एक दिन भी काम नहीं छोड़ा
जिम्मेदार पद पर होने के नाते दिनभर के कार्यक्रम पहले से तय होते हैं। संक्रमित होने के बाद भी उन्हें बुखार, खांसी या अन्य कोई दिक्कत नहीं हुई। मेडिटेशन, एक्सरसाइज करने के बाद ऑफिस के सारे काम घर से ऑनलाइन करते रहे। इसमें सभी बैठकें भी शामिल रहीं। इस कारण संक्रमित होने के बाद भी काम में किसी प्रकार की देरी नहीं हुई।
रोज 10 किमी वॉक और टेबल टेनिस से खुद को रखा फिट
उनके मुताबिक, वर्षों से दिनचर्या में वॉक से लेकर सीढ़ियां चढ़ने के साथ करीब 10 किलोमीटर चलता और टेबल-टेनिस खेलता हूं। खाने पर खास ध्यान रखता हूं। इससे मानसिक और शारीरिक फिटनेस बरकार रखी हुई ै। पिछले एक साल में ऑफिस में कई सहकर्मी संक्रमित हुए और मेरा उनसे संपर्क भी रहा था। जांच कराई पर हर बार रिपोर्ट नेगेटिव आती थी। मेरा मानना है कि फिटनेस पर फोकस रखते हैं तो शरीर में अपने आप एंटीबॉडी तैयार हो जाती है। इसी कारण मुझे या मेरे परिवार को अधिक दिक्कत नहीं आई।
पत्नी अब आईआईटी कैंपस के संक्रमितों का कर रहीं इलाज
पत्नी अब टेलीकाउंसलिंग के माध्यम से अस्पतालों और आईआईटी कैंपस में संक्रमितों का इलाज कर रही हैं। इसके अलावा, जागरूकता अभियान भी चलाया है, ताकि समय से मरीजों की जांच और इलाज शुरू हो सके। कैंपस में पांच से छह हजार लोग रहते हैं। इनमें छात्रों, शिक्षकों, कर्मियों के अलावा आवासीय परिसर में बड़ी संख्या में संक्रमित हैं। आईआईटी प्रबंधन ने उनके लिए विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार किया है। बाहर अस्पतालों में भी कहीं कोई बेड नहीं है। इसलिए कोशिश यही है कि शुरू से समय से दवा समेत पौष्टिक आहार आदि के माध्यम से उनकी स्थिति को संभाला जा सके। मेरी सलाह है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए इस समय दो मास्क पहनने जरूरी हैं। एक एन- 95 मास्क और उसके ऊपर दूसरा कोई भी सामान्य मास्क पहनना कारगर होगा। एक मास्क से बचना बेहद मुश्किल है।