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Virtual Post Mortem: एम्स दिल्ली में किए जा चुके हैं 12 वर्चुअल पोस्टमार्टम, लगते हैं 15-20 मिनट

Fri, 23 Sep 2022 06:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

Delhi News : कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के दिल्ली एम्स में निधन के बाद उनका वर्चुअल पोस्टमार्टम किया गया, जिसके चलते यह तकनीक फिर से चर्चाओं में है। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अब तक एक दर्जन से ज्यादा वर्चुअल पोस्टमार्टम किए जा चुके हैं। 
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एम्स दिल्ली - फोटो : फाइल
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विस्तार
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कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के दिल्ली एम्स में निधन के बाद उनका वर्चुअल पोस्टमार्टम किया गया, जिसके चलते यह तकनीक फिर से चर्चाओं में है। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अब तक एक दर्जन से ज्यादा वर्चुअल पोस्टमार्टम किए जा चुके हैं। 

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इसी तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने देश का पहला कोविड-19 पोस्टमार्टम भी किया था। हाल ही में दिल्ली में मोमोज खाने से हुई देश की पहली मौत के मामले में भी पोस्टमार्टम इसी तकनीक से किया गया और शव को हाथ लगाए बगैर डॉक्टरों ने श्वांस नली में मोमोज का टुकड़ा फंसा होने की पुष्टि की। 

15 से 20 मिनट का लगता है समय
फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार गुप्ता ने बताया, पिछले साल मार्च में वर्चुअल आटोप्सी की सुविधा शुरू की गई थी। अब तक 12 पोस्टमार्टम इस तकनीक से किए गए हैं। इसमें शव को किसी भी तरह का चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। महज सीटी स्कैन और एमआरआई की मदद से मृत्यु का कारण पता लगा लिया जाता है। इस प्रक्रिया में 15 से 20 मिनट का समय लगता है और शव विच्छेदन की जरूरत भी नहीं पड़ती है।
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दक्षिण पूर्वी एशिया में केवल दिल्ली एम्स में यह तकनीक
डॉ. गुप्ता ने बताया कि दक्षिण पूर्वी एशिया देशों में यह तकनीक अभी तक केवल दिल्ली एम्स के पास है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में इसे लेकर पहले से काम चला आ रहा है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, वर्चुअल ऑटोप्सी यानी शव को बगैर स्पर्श किए उसके आंतरिक अंगों की जांच सीटी स्कैन और एमआरआई की मदद से की जाती है। इस प्रक्रिया के तहत, शव एक बैग में पैक होता है और इसे सीटी स्कैन मशीन में ले जाया जाता है। कुछ ही सेंकड बाद, हजारों की संख्या में अलग-अलग अंगों की फोटो सामने आने लगती हैं, जिसका विश्लेषण करते हुए मौत के कारण का पता लगाया जाता है। 

हर मामले में चीर-फाड़ की जरूरत नहीं 
आंकड़ों के अनुसार, एम्स में हर साल तीन हजार से अधिक शवों के पोस्टमार्टम किए जाते हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ही करीब तीन जिला पुलिस का यह आधिकारिक केंद्र भी है। इसके अलावा, विवादास्पद या चर्चित मामलों में भी यहां पोस्टमार्टम किया जाता है। डॉ. गुप्ता का कहना है कि करीब 30 से 50 फीसदी पोस्टमार्टम में चीर फाड़ करने की जरूरत नहीं होती है। अभी तक तकनीक के अभाव की वजह से ऐसा करना पड़ता था लेकिन अब इसकी जरूरत भी नहीं है। आत्महत्या, सड़क हादसा जैसे ऐसे मामले, जिनमें मौत के कारण का पहले से पता हो वहां वर्चुअल ऑटोप्सी के जरिये काम चलाया जा सकता है। 

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