दिल्ली एनसीआर के नतीजों में दसवीं का पास प्रतिशत 100 फीसदी रहा है जबकि बारहवीं का पास प्रतिशत 99.93 फीसदी है। दसवीं केबीते साल केनतीजों पर गौर करें तो बीते साल पास प्रतिशत 97.82 फीसदी था जबकि बारहवीं का पास प्रतिशत 99.68 फीसदी रहा था।
काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) के दसवीं-बारहवीं के दिल्ली-एनसीआर के नतीजों का ग्राफ बीते साल के मुकाबले में बढ़ा है। बीते साल के मुकाबले इस बार दिल्ली-एनसीआर में दसवीं के नतीजों में जहां 2.18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं बारहवीं के नतीजों का ग्राफ 0.25 फीसदी बढ़ा है। दिल्ली-एनसीआर में दसवीं का रिजल्ट सौ फीसदी रहा है। खास बात यह है कि लड़के व लड़कियों का रिजल्ट एक समान रहा है। इसी तरह से बारहवीं में लड़के व लड़कियों का रिजल्ट एक समान 99.93 फीसदी रहा है।
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दिल्ली एनसीआर के नतीजों में दसवीं का पास प्रतिशत 100 फीसदी रहा है जबकि बारहवीं का पास प्रतिशत 99.93 फीसदी है। दसवीं केबीते साल केनतीजों पर गौर करें तो बीते साल पास प्रतिशत 97.82 फीसदी था जबकि बारहवीं का पास प्रतिशत 99.68 फीसदी रहा था। दसवीं में एससी कैटेगिरी के 242 विद्यार्थियों व 15 एसटी विद्यार्थियों का रिजल्ट 100 फीसदी है। जबकि ओबीसी कैटेगिरी के 1254 विद्यार्थियों का रिजल्ट 100 फीसदी रहा है।
आईसीएसई में इस बार दिल्ली-एनसीआर के 48 स्कूलों से 5,463 उम्मीदवारों में से 2,909 लड़के व 2,554 लड़कियां परीक्षा में बैठी थीं। बारहवीं यानी आईएससी के नतीजों में भी दिल्ली-एनसीआर के कुल 37 स्कूलों में बारहवीं में कुल 2,811 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी जिसमें से 1,418 लड़के व 1,393 लड़कियां शामिल रहीं। बारहवीं में एससी कैटेगिरी के 121 विद्यार्थियों का रिजल्ट 99.17, एसटी कैटेगिरी के 9 विद्यार्थियों व ओबीसी कैटेगिरी के 609 विद्यार्थियों का रिजल्ट 100 फीसदी रहा है।
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दसवीं की परीक्षा में डिस्लेक्सिया से पीड़ित 946 छात्र बैठे थे, जिसमें से 183 छात्रों ने 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। वहीं 22 नेत्रहीन छात्रों ने परीक्षा दी, जिसमें से 11 छात्रों ने 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। वहीं बारहवीं की परीक्षा में डिस्लेक्सिया से पीड़ित 167 छात्र बैठे थे। इन छात्रों में से 24 ने 90 फीसदी से अधिक अंक पाए हैं। जबकि नेत्रहीन छात्रों की संख्या 15 थी जिसमें से चार ने 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए।