बीते 90 दिनों में मेट्रो ने यात्रियों को करीब 65 दिन बेहाल किया है। 21 मई को येलो लाइन पर ओएचई का टूटना, 17 जून को येलो लाइन पर कश्मीरी गेट और केन्द्रीय सचिवालय के बीच टनल में जल रिसाव से 2 घंटे तक मेट्रो सेवा ठप, 29 मई को रेड लाइन शाहदरा-दिलशाद गार्डन के बीच ओएचई टूटने से 2 घंटे मेट्रो सेवा ठप और 23 जुलाई को तकनीकी खराबी के कारण दिनभर मजेंटा लाइन के प्रभावित रहने के मामले प्रमुख तकनीकी खराबियों में शामिल हैं। यात्रियों को दफ्तरों, स्कूल-कॉलेजों और अन्य गंतव्यों तक पहुंचने में जद्दोजहद करनी पड़ी और मिनटों का सफर घंटों में करना पड़ा।
लगभग 3 महीनों से लगातार जारी मेट्रो में तकनीकी खराबी का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। पालम और सदर बाजार छावनी के बीच मेट्रो ट्रेनें 25 किमी प्रतिघंटा की प्रतिबंधित रफ्तार पर चलाई गई।
इससे पहले मंगलवार को भी दिनभर मजेंटा लाइन तकनीकी खराबी का शिकार हुई, जिसके चलते जनकपुरी वेस्ट से सदर बाजार के बीच सिंगल लाइन पर ट्रेनें चलाई गयीं और सदर बाजार छावनी से बॉटनिकल गार्डन के बीच लूप में ट्रेनें चलाई गईं।
क्या कमजोर होने लगा मेट्रो ट्रैक?
दिल्ली मेट्रो का रेल नेटवर्क वर्तमान में 373 किमी है और इस पर 271 मेट्रो स्टेशन हैं। सूत्रों की मानें तो मेट्रो नेटवर्क की कुछ लाइनों पर मेट्रो ट्रैक भी कमजोर होने लगा है, जिसकी वजह से कई बार ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं। हालांकि, इस संबंध में डीएमआरसी प्राथमिक तौर पर सभी कोशिश कर रही है, लेकिन ट्रैक के कमजोर होने से मेट्रो ट्रेनों के संचालन में बड़ी समस्या आने की संभावना भी पैदा होने लगी है।
क्या कहना है डीएमआरसी प्रबंधन
डीएमआरसी प्रवक्ता का कहना है कि लाइनों की मरम्मत का कार्य रात के समय किया जाता है और ज्यादा समय ना मिलने की स्थिति कुछ हिस्सों पर तकनीकी खराबियों के कारण ट्रेनों को यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर प्रतिबंधित रफ्तार पर चलाया जाता है। यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए पूरी कोशिशें जारी हैं।