तीनों नगर निगमों के चुनाव में वर्ष 2017 की तुलना में इस बार 14 लाख से अधिक नए मतदाता उम्मीदवारों का भविष्य तय करने वालों में शामिल होंगे। वर्ष 2017 में तीनों नगर निगमों के 272 वार्डों में करीब एक करोड़ 32 लाख मतदाता थे, जबकि इस बार इन वार्डों में करीब एक करोड़ 46 लाख मतदाता हैं। पांच साल के दौरान बढ़े मतदाताओं में अधिकांश युवा हैं और वे पहली या फिर दूसरी बार तीनों नगर निगमों के चुनाव में मतदान करेंगे।
तीनों नगर निगमों के वार्डों में गत पांच साल की तुलना में इस बार करीब 14 लाख मतदाता बढ़ गए हैं। मतदाताओं की संख्या में अनाधिकृत कालेनियों, गांवों और जेजे कालोनी बाहुल वार्डों में बढ़ोतरी हुई है। शहरी इलाके के वार्डों में मतदाताओं की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई है। उधर समस्त मतदाताओं में 40 वर्ष से कम आयु के 45 प्रतिशत मतदाता शामिल है। इन मतदाताओं में मतदान करने के प्रति बहुत अधिक उत्साह होता है।
तीनों नगर निगमों के चुनाव में करीब 55 प्रतिशत मतदान होता है और मतदान प्रतिशत बढ़ाने में 40 वर्ष से कम आयु के मतदाताओं की अहम भूमिका रहती है। लिहाजा तीनों नगर निगमों के चुनाव में उम्मीदवारों का भविष्य तय करने में 40 वर्ष से कम आयु के मतदाताओं की अहम भूमिका रहने की संभावना है। इन 45 प्रतिशत मतदाताओं में 55 पुरुष और 45 प्रतिशत महिला मतदाता है।
राजनीतिक दलों को भी मालूम है कि 40 वर्ष से कम आयु के मतदाताओं का मत प्रतिशत बहुत अधिक होता है। इस कारण वह उन्हें लुभाने पर मुख्य ध्यान देते हैं। एक ओर राजनीतिक दल युवाओं को टिकट देने के मामले में तवज्जो देते हैं। वहीं दूसरी ओर अपने घोषणा पत्र में उनसे जुड़ी घोषणाओं की झड़ी लगाते हैं। लिहाजा इस बार भी राजनीतिक दल युवाओं को थौक में टिकट देंगे और उन्हें साधते हुए अपना घोषणा पत्र तैयार करेंगे।
तीनों नगर निगमों के वार्डों में मतदाताओं का आयु वर्ग
आयु वर्ग मतदाता
18-19 01 लाख 15 हजार
20-29 26 लाख 90 हजार
30-39 41 लाख 40 हजार
40-49 33 लाख 50 हजार
50-59 21 लाख 99 हजार
60-69 12 लाख 45 हजार
70-79 07 लाख 05 हजार
80 से अधिक 02 लाख 30 हजार