शिकायतकर्ताओं ने बताया कि 2013 में उनकी मुलाकात संजय से हुई थी। उसने पीड़ितों को सोने और हीरे के कारोबार में मोटे मुनाफे का झांसा दिया। उसने बताया कि उनकी प्रापर्टी को बैंक में गिरवी रखकर कैश क्रेडिट लिमिट ले सकते हैं। यह रकम कारोबार में लगा कर मुनाफा कमा सकते हैं। उसने हीरे और सोने के कारोबार में महारत हासिल होने की बात कहकर उन्हें लुभाया। उसकी बातों में आकर पीड़ितों ने अपनी प्रॉपर्टी ओवरसीज बैंक के पास गिरवी रख दी और लगभग 19 करोड़ रुपये का कैश क्रेडिट लोन ले लिया।
लोन नहीं चुकाने पर बैंक ने खाते को एनपीए घोषित किया
पीड़ितों ने बताया कि एक साल बाद लोन की रकम वापस नहीं करने पर बैंक ने खाते को एनपीए घोषित कर दिया और प्रॉपर्टी को नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। पुलिस ने मामले पर कार्रवाई करते हुए वर्ष 2019 में संजय की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी फरार चल रहा था। पुलिस ने अदालत से उसे भगोड़ा करार करवाने के बाद उसकी तलाश शुरू की। तकनीकी जांच में पता चला कि वह रमेश नगर में छुपकर रह रहा है। पुलिस टीम ने गुरुवार को उसे गिरफ्तार कर लिया।