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Delhi: रोबोटिक सर्जरी से घुटना प्रत्यारोपण, जल्दी स्वस्थ होंगे मरीज, 850 सर्जन की मौजूदगी में दिखाया गया डेमो

Sun, 06 Nov 2022 12:37 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

शनिवार को दिल्ली आर्थोपेडिक एसोसिएशन की वार्षिक कॉंफ्रेंस की बैठक में रोबोटिक सर्जरी से घुटना प्रत्यारोपण का लाइव डेमो दिखाया गया। इस दौरान सफदरजंग, एम्स, डॉ. राम मनोहर लोहिया, डीडीयू, जीटीबी सहित सरकारी व निजी अस्पतालों से आए 850 सर्जन पहुंचे।
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एम्स दिल्ली (फाइल फोटो) - फोटो : फाइल
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विस्तार
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घुटना प्रत्यारोपण के लिए रोबोटिक सर्जरी न केवल मरीज के दर्द को कम करेगा, बल्कि रिकवरी भी तेजी से होगी और इंप्लांट भी लंबे समय तक काम करेगा। प्रत्यारोपण के लिए इस नई तकनीक की शुरुआत आने वाले दिनों में एम्स, सफदरजंग, आरएमएल सहित दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में हो सकती है।

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दरअसल शनिवार को दिल्ली आर्थोपेडिक एसोसिएशन की वार्षिक कॉंफ्रेंस की बैठक में रोबोटिक सर्जरी से घुटना प्रत्यारोपण का लाइव डेमो दिखाया गया। इस दौरान सफदरजंग, एम्स, डॉ. राम मनोहर लोहिया, डीडीयू, जीटीबी सहित सरकारी व निजी अस्पतालों से आए 850 सर्जन पहुंचे। कॉंफ्रेस के दौरान डॉक्टरों को कृत्रिम हड्डी में रोबोट के माध्यम से सर्जरी करके दिखाया गया।

 

कॉंफ्रेंस के संबंध में डॉ. शेखर श्रीवास्तव ने बताया कि घुटना प्रत्यारोपण में रोबोटिक सर्जरी काफी फायेमंद साबित होगी। इससे न केवल मरीज का दर्द कम होगा, बल्कि नई तकनीक से सर्जरी होने पर सटीकता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस तकनीक में पहले मरीज का सीटी स्कैन किया जाता है। उसके बाद सर्जरी व इंप्लांट को लेकर नीति तैयार की जाती है जिसे रोबोट में अपलोड कर दिया जाता है। 

 

रोबोट उक्त जानकारी के आधार पर ज्वाइंट रिप्लेसमेंट को लेकर सटीकता के साथ सर्जरी करता है। इससे ऑपरेशन के बाद में होने वाली जटिलताएं कम होती हैं। वहीं सम्मेलन में आए अन्य डॉक्टरों ने कहा कि इस तकनीक से फिलहाल दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में सर्जरी नहीं हो रही है। उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले दिनों में दिल्ली के बड़े सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा आ सकती है। 

 
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देश में 1.5 करोड़ मरीजों में घुटने का रोग 
देश में इस समय 1.2 से 1.5 करोड़ मरीज घुटने के ऐसे गंभीर रोग से जूझ रहे हैं। जिन्हें तत्काल घुटना प्रत्यारोपण की जरूरत है। पारंपरिक घुटना प्रत्यारोपण की जगह अब रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण की सुविधा भी उपलब्ध है। जिसने प्रत्यारोपण की जटिलताओं को काफी कम कर दिया है।
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