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Independence Day: अजब-गजब नामों वाली पतंगों की मांग ज्यादा, मांझे की कीमत 500 से 800 रुपये; चेतावनी जारी

Thu, 03 Aug 2023 08:27 AM IST
अनुज कुमार नवनीत शरण, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में मांग बढ़ने के साथ ही पतंग, चरखे और मांझे की कीमत भी बढ़ गई है। अजब-गजब नामों वाली पतंगों से बाजार सज गए हैं। 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर हर साल दिल्ली में पतंग उड़ाकर जश्न मनाया जाता है। 
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पंतगों से सजे दिल्ली के बाजार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इस बार जश्न-ए-आजादी परी, लग्गू, चीरा, तावा पतंगों के साथ मनेगी। पंद्रह अगस्त से पहले इसी तरह के अजब-गजब नामों वाली पतंगों से बाजार सज गए हैं। सदर बाजार, चांदनी चौक, जामा मस्जिद समेत अन्य चौक-चौराहों पर पतंग ही पतंग दिख रही है। मांग बढ़ने के साथ ही पतंग, चरखे और मांझे की कीमत भी बढ़ गई है। आम दिनों में पतंग का सौ रुपये का पैकेट इस वक्त 150 रुपये में मिल रहा है, जबकि मांझे की कीमत 500-800 रुपये के बीच है। 

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दरअसल, 15 अगस्त के मौके पर पतंगबाजी की पुरानी रिवायत है। पुरानी दिल्ली के लोग पतंग उड़ाकर आजादी का जश्न मनाते हैं। जश्न-ए-आजादी के करीब पंद्रह दिन पहले ही दिल्ली के बाजार तरह-तरह की पंतगों से सजे हुए हैं। पतंग विक्रेता राहुल ने बताया कि पन्नी वाले पतंगों के साथ ही कागज वाले पतंगों की भी मांग है। तावा पतंग लोगों को लुभाते हैं। 

इसी तरह तिरंगा पतंग स्वतंत्रता दिवस पर सबसे अधिक बिकते हैं। कारोबारियों का कहना है कि इसके अलावा स्लोगन लिखे पतंग, शांति का संदेश देती, कबूतर की तस्वीर लगी पतंग, प्रधानमंत्री की तस्वीर वाली पतंग के साथ ही डिजनीलैंड, कार्टून, स्पाइडरमैन, छोटा भीम, छुटकी वाले पतंगों की भी बाजार में भरमार है।

पुरानी दिल्ली के बहादुरगढ़ रोड पर मौसमी पतंगों के विक्रेताओं का कहना है कि पतंग व मांझे इस साल दोनों महंगे हैं। चीन के मांझे पर बिक्री पर लगी पाबंदी से महंगाई बढ़ी है। कागज के दाम भी बढ़ गए हैं। सचिन ने बताया कि मौसमी बिक्री की वजह से कई दुकानदार मनमर्जी दाम रखते हैं। 

देसी मांझे भी कम खतरनाक नहीं
एक दुकानदार ने बताया कि चाइनीज मांझे नायलॉन, प्लास्टिक व सिंथेटिक, मेटेलिक होते हैं। इस पर शीशे के कण लगाए जाते हैं। इससे मांझा धारदार होने के साथ ही मजबूत हो जाता है। उन्होंने बताया कि देसी मांझे भी कम खतरनाक नहीं हैं। मजबूत तो नहीं होते हैं चाइनीज मांझे की तरह, लेकिन धारदार बनाने के लिए शीशे के कण का लेप लगाया जाता है। 

क्या कहते हैं पतंग उड़ाने का शौक रखने वाले
पतंग उड़ाने वाले कहते हैं कि चीन का मांझा प्लास्टिक का बना होता है। मजबूत होने के कारण पतंग कम कटती है। पतंगों के ज्यादा दूर जाने पर डोर टूटने का डर नहीं होता। मजबूत और अच्छा मांझा मांगने पर ज्यादातर दुकानदार सस्ता होने की वजह से चीन से मिलता जुलता मांझा दे देते हैं। 

पतंगबाजी के शौकीन बिजली लाइनों के पास न उड़ाएं पतंग
स्वतंत्रता दिवस पर पतंगबाजी के शौकीनों से बीएसईएस ने अपील की है कि वे बिजली के खंभों, तारों, ट्रांसफॉर्मरों और अन्य उपकरणों के आसपास पतंग न पड़ाएं। पतंग उड़ाने के लिए मेटल-युक्त मांझे का प्रयोग न करें। मेटेलिक मांझा न सिर्फ इलाके की बिजली गुल कर सकता है, बल्कि इससे पतंग उड़ाने वालों की जान को भी खतरा हो सकता है। 

मेटल-कोटेड मांझा जब बिजली की तारों व अन्य उपकरणों के संपर्क में आता है, तो बिजली का करंट मांझे से प्रवाहित होकर पतंग उड़ाने वाले व्यक्ति के शरीर तक पहुंच सकता है। जान को भी जोखिम में डाल सकता है। अगर 66/33 केवी की सिर्फ एक लाइन ट्रिप हो जाए, तो इससे 10 हजार से अधिक लोगों के घरों में अंधेरा छा सकता है। 
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बिजली के उपकरणों को क्षतिग्रस्त करना कानूनन जुर्म
बिजली आपूर्ति में बाधा पहुंचाना और बिजली के उपकरणों को क्षतिग्रस्त करना कानूनन जुर्म है। इसके लिए इलेक्ट्रिसिटी एक्ट और दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत सजा का प्रावधान है। ट्रिपिंग को ध्यान में रख बीएसईएस और टाटा पावर ने अपनी ओएंडएम टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है। टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कहीं पतंगबाजी की वजह से ट्रिंपिंग होती है, तो घटनास्थल पर तुरंत पहुंचकर इलाके में जल्द से जल्द बिजली व्यवस्था बहाल की जाए। आपात स्थिति में उपभोक्ता बीएसईएस के हेल्पलाइन नंबरों 19123- बीआरपीएल और 19122- बीवाईपीएल पर संपर्क कर सकते हैं।
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