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दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: हाइपरटेंशन को सिर्फ जीवनशैली रोग नहीं माना जा सकता, सेवानिवृत्त IAF अधिकारी को राहत

Thu, 22 Jan 2026 02:16 PM IST
राहुल तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने  एक अहम मामले कहा कि प्राथमिक उच्च रक्तचाप को केवल जीवनशैली से जुड़ी बीमारी बताकर दिव्यांग पेंशन से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति की जीवनशैली अलग होती है। बिना पूरी चिकित्सकीय जांच और ठोस कारण बताए पेंशन रोकना गलत है।
 
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दिल्ली हाईकोर्ट, Delhi High Court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिव्यांग पेंशन से जुड़े एक अहम मामले में केंद्र सरकार को झटका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्राथमिक उच्च रक्तचाप को सिर्फ जीवनशैली से जुड़ी बीमारी बताकर किसी सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी को दिव्यांग पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जीवनशैली हर व्यक्ति की अलग होती है। बिना पूरी जांच और ठोस कारण बताए केवल बीमारी को जीवनशैली विकार बताकर दिव्यांग पेंशन से इनकार करना गलत है। कोर्ट ने आईएएफ अधिकारी को पेंशन देने के फैसले को सही ठहराया।

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न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत पी.एस. अरोड़ा की पीठ ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायाधिकरण ने फैसला सुनाया था कि आईएएफ अधिकारी प्राथमिक उच्च रक्तचाप के लिए दिव्यांग पेंशन के लाभ का हकदार है।

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पीठ ने अपने 19 जनवरी के फैसले में कहा कि जीवनशैली व्यक्ति-दर-व्यक्ति भिन्न होती है। इसलिए, केवल यह कहना कि कोई बीमारी जीवनशैली विकार है, दिव्यांग पेंशन से इनकार करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता, जब तक कि चिकित्सा बोर्ड ने संबंधित व्यक्ति की जांच न की हो और प्रासंगिक विवरण दर्ज न किए हों। न्यायालय ने कहा कि इस मामले के तथ्यों को देखते हुए, न्यायाधिकरण द्वारा निकाले गए निष्कर्षों में कोई खामी नहीं पाई गई।

यह अधिकारी अक्तूबर 1981 में वायु सेना में शामिल हुआ था और मार्च 2019 में 37 साल, पांच महीने और चार दिन की सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हुआ। केंद्र सरकार ने उच्च रक्तचाप के लिए दिव्यांग पेंशन देने का विरोध किया था और तर्क दिया था कि अधिकारी को यह दिव्यांगता शांति क्षेत्र में हुई थी, जो सैन्य सेवा से न तो संबंधित थी और न ही सैन्य सेवा से बढ़ी थी। यह भी प्रस्तुत किया गया था कि चिकित्सा बोर्ड की जांच के अनुसार, अधिकारी का उच्च रक्तचाप एक 'अज्ञात/जीवनशैली से संबंधित विकार' था।
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न्यायालय ने अपने फैसले में इस बात का भी उल्लेख किया कि यह एक स्वीकृत तथ्य था कि अधिकारी को आईएएफ में नियुक्ति के समय कोई दिव्यांगता नहीं थी। न्यायालय ने आगे कहा कि चिकित्सा बोर्ड ने इस निष्कर्ष का समर्थन करने के लिए कोई कारण नहीं बताया कि प्राथमिक उच्च रक्तचाप का सैन्य सेवा से कोई संबंध नहीं था। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि उच्च रक्तचाप एक जीवनशैली दिव्यांगता क्यों है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कानून की स्थिति यह है कि चिकित्सा बोर्ड का यह दायित्व है कि वह अपने निष्कर्षों के लिए कारण बताए। इसलिए, चिकित्सा बोर्ड को अपने ऊपर रखे गए दायित्व को निभाते हुए कारण और निष्कर्ष दर्ज करने चाहिए।
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