दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाहर लाल नेहरू(जेएनयू) के नौ केंद्र प्रमुख को कोई भी बड़ा निर्णय लेने से रोक दिया है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा उनकी नियुक्ति को बिना किसी अधिकार के बताया है। कोर्ट ने कहा है कि कुलपति को नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं है।
न्यायमूर्ति राजीव शकधर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि कुलपति को केंद्रों या विशेष केंद्रों के अध्यक्षों की नियुक्ति करने की शक्ति नहीं है। क्योंकि, जेएनयू कार्यकारी परिषद को नियुक्ति की शक्ति प्रदान करता है। न्यायमूर्ति तलवंत सिंह वाली पीठ ने प्रोफेसर अतुल सूद की याचिका पर फैसाल सुनाया है।
सूद ने नौ नियुक्तियों को चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि नियुक्ति का अधिकार कुलपति के पास नहीं है। जेएनयू ने इस तर्क को खारीज करते हुए था कि जेएनयू कुलपति ने निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए नियुक्ति की थी। वहीं, हाई कोर्ट ने कहा है कि कुलपति ऐसी शक्तियों का इस्तेमाल सिर्फ आपातकालीन या तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता होने पर ही कर सकते हैं।
जेएनयू की वकील मोनिका अरोड़ा ने कहा कि विभिन्न केंद्रों में अध्यक्षों को नियुक्त करने की शक्ति समय-समय पर कुलपति द्वारा प्रयोग की जाती है, जिसे बाद में कार्यकारी परिषद द्वारा अनुमोदित किया जाता है।