उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को आपराधिक प्रक्रिया (पहचान)अधिनियम 2022 के प्रावधानों की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने केंद्र को 6 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार इस याचिका के विचारयोग्य मुद्दे सहित अपना जवाब दाखिल करें। पीठ ने मामले की सुनवाई 16 नवंबर तय की है। आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक लोकसभा द्वारा 4 अप्रैल 2022 और राज्य सभा द्वारा 6 अप्रैल, 2022 को पारित किया गया था। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की सहमति मिली और अंतत: 18 अप्रैल को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया।
अधिनियम में आपराधिक मामलों में पहचान और जांच के उद्देश्य से दोषियों और अन्य व्यक्तियों की माप लेने और रिकॉर्ड को संरक्षित करने का प्रावधान है। यह उंगलियों के निशान, हथेली और पैरों के निशान, फोटोग्राफ, आईरिस और रेटिना स्कैन, भौतिक, जैविक नमूने, और उनके विश्लेषण आदि सहित व्यक्तियों के उचित शरीर माप लेने की मंजूरी के लिए कानूनी मंजूरी भी देता है।