कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने यूकेजी की पांच वर्षीय छात्रा की अपील को खारिज कर दिया। याची ने सिंगल जज के आदेश के खिलाफ अपील की थी जिन्होंने न्यूनतम आयु मानदंड में बदलाव के लिए उसकी चुनौती को खारिज कर दिया गया था। दाखिले के लिए पहले आयु सीमा पांच वर्ष थी लेकिन केवी ने इस सत्र में आयु सीमा छह वर्ष कर दी थी।
उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ ने भी केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया जिसमें आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए केंद्रीय विद्यालयों में कक्षा एक में प्रवेश के लिए आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष तय की गई थी।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने यूकेजी की पांच वर्षीय छात्रा की अपील को खारिज कर दिया। याची ने सिंगल जज के आदेश के खिलाफ अपील की थी जिन्होंने न्यूनतम आयु मानदंड में बदलाव के लिए उसकी चुनौती को खारिज कर दिया गया था। दाखिले के लिए पहले आयु सीमा पांच वर्ष थी लेकिन केवी ने इस सत्र में आयु सीमा छह वर्ष कर दी थी।
पीठ ने कहा उन्हें अपीलकर्ता की इस दलील में कोई दम नहीं लगा कि उम्र में बदलाव अचानक और प्रतिकूल है। पीठ ने कहा अगर बच्चा पांच साल का है और इसे बढ़ाकर छह कर दिया गया है तो इसमें अचानक क्या है? आपको अगले साल मौका मिलेगा।
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अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता अगले साल कक्षा एक में प्रवेश के लिए केवी में आवेदन करने की हकदार होगी और इस साल उसके लिए अन्य स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए रास्ता खुला है, जिन्होंने अभी तक एनईपी लागू नहीं किया है। पीठ ने कहा कि नीति के कार्यान्वयन के बारे में अचानक कुछ भी नहीं है क्योंकि नीति को लागू करने के लिए हमेशा एक निश्चित तारीख होती है।
11 अप्रैल को न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए केंद्रीय विद्यालय में कक्षा 1 में प्रवेश के लिए 31 मार्च, 2022 तक न्यूनतम आयु मानदंड के साथ याचिकाओं को खारिज कर दिया था।