अदालत ने कहा वे न तो खुद से हट रहे हैं और न ही किराये पर फ्लैट में या रैन बसेरे में जा रहे हैं। अदालत ने संबंधित दिल्ली पुलिस के संयुक्त पुलिस उपायुक्त, संबंधित पुलिस उपायुक्त को मंदिर परिसर से झुग्गियां व धर्मशाला खाली कराने की प्रक्रिया की निगरानी करने का आदेश दिया है। अदालत ने इसके अलावा, डीडीए उपाध्यक्ष, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त को इस प्रक्रिया में पुलिस को पूरा सहयोग करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा साफ किया कि उन्होंने 15 मार्च के आदेश में सभी विभाग बैठक कर झुग्गियां व धर्मशाला खाली कराने की प्रक्रिया 24 मार्च से ही शुरू करने का आदेश दिया था।
अदालत ने मंदिर का कामकाज देखने के लिए नियुक्त किए गए प्रशासक पूर्व न्यायमूर्ति जेआर मिड्डा अन्य निकाय को इस काम के लिए जरूरत के हिसाब से लोगों को लगाने की छूट दे दी है। साथ ही, कलाकाजी थाना प्रभारी, मंदिर के पुजारी और बारीदार को भी झुग्गियां व धर्मशाला खाली कराने में पूरा सहयोग देने को कहा है। अदालत ने मंदिर परिसर में अस्थायी दुकान, कियोस्क बनाने के लिए नियुक्त आर्किटेक को 31 मार्च को होने वाली सुनवाई पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें इसमें बिजली-पानी के कनेक्शन के लिए संबंधित निकाय में जब भी जरूरत हो, आवेदन करने का आदेश दिया है।
अदालत ने नवरात्र में आने वाले श्रद्धालुओं को फूल-माला, प्रसाद, पूजा सामग्री और पूजा के बर्तन बेचने के लिए टेबल लगाने की इजाजत देने का निर्देश दिया है। साथ ही प्रशासक से कहा है कि यह टेबल लगाने की इजाजत सिर्फ उन्हें ही दी जाए, जिन्होंने अस्थायी दुकान के लिए 30-30 हजार रुपये जमा कराए हैं।
अदालत ने सुनवाई के दौरान जल बोर्ड को नवरात्र उत्सव के दौरान कालकाजी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त एवं स्वच्छ पेयजल का प्रबंध करने का आदेश दिया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि मंदिर परिसर में सीवर लाइन किसी भी हाल में जाम नहीं होने पाए।