दिल्ली उच्च न्यायालय ने आगामी अंधेरी पूर्व विधानसभा उपचुनाव के लिए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना धड़े के लिए जलती मशाल चिह्न आरक्षित करने के भारत के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली समता पार्टी की याचिका को खारिज कर दिया है।
उच्च न्यायालय ने बुधवार को समता पार्टी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट- ‘शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी’ को ‘मशाल’ का चुनाव चिन्ह आवंटित करने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई थी।
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न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने कहा कि याचिकाकर्ता (समता पार्टी) वर्ष 2004 में एक मान्यता प्राप्त पार्टी की अपनी स्थिति खोने के बाद से सिंबल पर कोई भी अधिकार साबित करने में विफल रही। कोर्ट ने कहा कि अगर पार्टी का चुनाव चिन्ह पर कोई अधिकार होता तो वह चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश की धारा 10 (ए) के अनुसार छह साल की समाप्ति के बाद भी समाप्त हो जाता। अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में याचिकाकर्ता का चिन्ह पर कोई अधिकार नहीं है।
अदालत ने कहा कि भले ही पार्टी 2014 में एक ही चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ी हो, लेकिन यह सिंबल के अधिकार का कोई साक्ष्य पेश नहीं कर पाई। अदालत ने समता पार्टी के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि चुनाव आयोग को एक अधिसूचना जारी करनी चाहिए थी, जिसमें कहा जाए कि मशाल जलाना एक स्वतंत्र प्रतीक है। समता पार्टी ने प्रतीक के आवंटन को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि यह मूल रूप से उनका है। उन्होंने चुनाव आयोग से भी शिकायत की थी। अपनी याचिका में, उन्होंने तर्क दिया था कि 2004 में पार्टी की मान्यता समाप्त होने के बावजूद 2014 में हुए आम चुनावों के लिए पार्टी को यह चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया था।