हाईकोर्ट ने कालका जी मंदिर परिसर में अवैध निर्माण रोकने के लिए मंदिर परिसर के चारों ओर चहारदीवारी बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर रोज अतिक्रमण होता रहा तो मंदिर के पुनर्विकास की पूरी प्रक्रिया खतरे में पड़ जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 13 मई तय की है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कालकाजी मंदिर के रखरखाव और पुनर्विकास के पहलू से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। कालकाजी मंदिर परिसर और मंदिर क्षेत्र से सटी भूमि में निरंतर अतिक्रमण के बारे में व्यक्त की गई चिंताओं को देखते हुए अदालत ने पूरी भूमि की सुरक्षा के लिए एक बैरिकेड या चहारदीवारी के निर्माण के निर्देश दिए।
अदालत ने कहा इस काम के लिए संबंधित तहसीलदार या राजस्व अधिकारियों के साथ-साथ पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और डीडीए अधिकारी भी सहयोग प्रदान करेंगे। अदालत ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को कालकाजी मंदिर कोष से वास्तुकार को 10 लाख रुपये जारी करने का निर्देश दिया है।
शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने एसएचओ कालकाजी के माध्यम से अदालत को यह भी आश्वासन दिया कि धातु की चादरों या किसी अन्य प्रकार के बैरिकेडिंग के माध्यम से बनाई गई चहारदीवारी की नियमित रूप से निगरानी की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कालकाजी मंदिर में कोई अनधिकृत कब्जा या अतिक्रमण न हो। इस बीच कोर्ट ने एसडीएमसी और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वे रेहड़ी-पटरी वालों को मंदिर की परिधि में फेरी लगाने के लिए कोई अनुमति न दें।