लॉकडाउन के चलते शैक्षणिक वर्ष के लिए उपर्युक्त राशि में 15 प्रतिशत की कटौती होगी, लेकिन चालू वर्ष के लिए कोई कटौती नहीं की जाएगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि उक्त व्यवस्था से शैक्षणिक वर्ष 2021-22 की पूरी फीस वसूली पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के पिछले वर्ष स्कूल फीस मामले में दिए फैसले का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया कि कोई भी स्कूल फीस अदा न होने पर बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं से वंचित नहीं करेगा और न ही उनका नाम 10वीं व 12वीं कक्षा बोर्ड परीक्षा से रोकेगा।
इसके अलावा अन्य कक्षाओं के भी परिणाम नहीं रोके जाएंगे। इसके अलावा यदि कोई बच्च व अभिभावक फीस मामले को लेकर आवेदन करता है तो उस पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए। अदालत ने स्कूल के खर्चों पर रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा कि किराया, टैक्स, यात्रा, वाहन, बीमा शुल्क, लेखा परीक्षकों का पारिश्रमिक, भवन की मरम्मत और रखरखाव और उपकरणों के रखरखाव, फर्नीचर और स्थिरता जैसे खर्च सभी खर्च हैं जो स्कूल के बंद होने के बावजूद स्कूलों द्वारा किए जाते रहेंगे।
अदालत ने कहा यदि उक्त मरम्मत और अन्य खर्च नहीं किए जाते हैं तो इससे स्कूलों के भवन, बुनियादी ढांचे और कामकाज को नुकसान होना स्वाभाविक है। इसके अलावा यह भी नहीं कहा जा सकता कि स्कूल भवन पूरी तरह से बंद है। यह भवन प्रशासनिक कारणों से और यहां तक कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर ऑनलाइन कक्षाएं आदि आयोजित करने के लिए कार्यशील रहे हैं।