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अभिभावकों को लगा झटका: हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार का आदेश किया रद्द, स्कूलों को वार्षिक-विकास शुल्क लेने की दी अनुमति

Mon, 31 May 2021 10:43 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा कि सभी स्कूल पूरे शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए वार्षिक और विकास शुल्क वसूलने के हकदार होंगे। अदालत ने यह निर्देश स्कूलों की एक्शन कमेटी की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका में सरकार के इन दोनों आदेशों को चुनौती दी गई थी।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को राहत प्रदान करते हुए उन्हें बच्चों से वार्षिक शुल्क और विकास शुल्क लेने की अनुमति प्रदान कर दी। अदालत ने दिल्ली सरकार द्वारा 18 अप्रैल 20 व 28 अगस्त 20 को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कोरोना महामारी के दौरान स्कूलों द्वारा वार्षिक शुल्क और विकास शुल्क लेने को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया था। अदालत ने कहा कि स्कूल बंद रहे या खुले स्कूलों को खर्च करना ही पड़ता है।

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न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने अपने 45 पृष्ठों के फैसले में स्पष्ट किया कि डीओई के पास निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस स्ट्रक्चर में हस्तक्षेप करने का तब तक कोई अधिकार नहीं, जब तक यह साबित न हो जाए कि वह मुनाफाखोरी कर रहा है। अदालत ने वार्षिक शुल्क व विकास शुल्क के संबंध में स्कूल के खर्चो के संबंध में पेश सूची का अध्ययन करते हुए कहा कि इससे स्पष्ट है कि वे खर्च करते रहते हैं और इसका स्कूलों के शारीरिक रूप से खुलने या बंद होने से कोई संबंध नहीं है। 

अदालत ने कहा कि सभी स्कूल पूरे शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए वार्षिक और विकास शुल्क वसूलने के हकदार होंगे। अदालत ने यह निर्देश स्कूलों की एक्शन कमेटी की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका में सरकार के इन दोनों आदेशों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि स्कूल यह राशि 10 जून 2021 से छह मासिक किस्तों में वसूल सकते हैं। 

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लॉकडाउन के चलते शैक्षणिक वर्ष के लिए उपर्युक्त राशि में 15 प्रतिशत की कटौती होगी, लेकिन चालू वर्ष के लिए कोई कटौती नहीं की जाएगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि उक्त व्यवस्था से शैक्षणिक वर्ष 2021-22 की पूरी फीस वसूली पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के पिछले वर्ष स्कूल फीस मामले में दिए फैसले का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया कि कोई भी स्कूल फीस अदा न होने पर बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं से वंचित नहीं करेगा और न ही उनका नाम 10वीं व 12वीं कक्षा बोर्ड परीक्षा से रोकेगा। 

इसके अलावा अन्य कक्षाओं के भी परिणाम नहीं रोके जाएंगे। इसके अलावा यदि कोई बच्च व अभिभावक फीस मामले को लेकर आवेदन करता है तो उस पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए। अदालत ने स्कूल के खर्चों पर रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा कि किराया, टैक्स, यात्रा, वाहन, बीमा शुल्क, लेखा परीक्षकों का पारिश्रमिक, भवन की मरम्मत और रखरखाव और उपकरणों के रखरखाव, फर्नीचर और स्थिरता जैसे खर्च सभी खर्च हैं जो स्कूल के बंद होने के बावजूद स्कूलों द्वारा किए जाते रहेंगे।

अदालत ने कहा यदि उक्त मरम्मत और अन्य खर्च नहीं किए जाते हैं तो इससे स्कूलों के भवन, बुनियादी ढांचे और कामकाज को नुकसान होना स्वाभाविक है। इसके अलावा यह भी नहीं कहा जा सकता कि स्कूल भवन पूरी तरह से बंद है। यह भवन प्रशासनिक कारणों से और यहां तक कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर ऑनलाइन कक्षाएं आदि आयोजित करने के लिए कार्यशील रहे हैं।
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