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एहतियात: हाईकोर्ट बार एसोसिएशन बोला, वकील जांच में सहयोग करें, उल्लंघन करने पर हो कार्रवाई

Tue, 12 Oct 2021 07:38 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

रोहिणी कोर्ट में गैंगवार की घटना के बाद हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेकर दिल्ली पुलिस आयुक्त, दिल्ली विधिज्ञ परिषद, सभी बार एसोसिएशन और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे थे।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में जिला अदालतों की सुरक्षा के पुख्ता करने के लिए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि वकील सुरक्षा जांच में सहयोग करे और जो वकील इसका उल्लंघन करता है उसके खिलाफ दिल्ली बार काउंसिल उचित कार्रवाई करे। वहीं दिल्ली पुलिस ने अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ लोगों के प्रवेश को सीमित करने पर जोर दिया है। हाईकोर्ट के समक्ष पेश रिपोर्ट में पुलिस ने सुझाव दिया कि सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे अदालतों की निगरानी की जाए। पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की ओर से पेश सुझाव में कहा गया है कि अदालतें आसान निशाने पर होती हैं। लिहाजा यहां आवश्यक होने पर ही लोगों को प्रवेश की अनुमति दी जाए।

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रोहिणी कोर्ट में गोलीबारी के बाद हाईकोर्ट ने मांगे थे सुझाव
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में हॉकरों व किताबें बेचने वाले सेल्समैन के आने पर भी ध्यान आकर्षित किया। साकेत बार एसोसिएशन के सुझाव न मिलने पर अदालत ने सुनवाई 25 अक्तूबर तय कर दी। पीठ के समक्ष पुलिस आयुक्त की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालतों की त्रीस्तरीय सुरक्षा का सुझाव दिया है। रोहिणी कोर्ट में 24 सितंबर को हुई गैंगवार की घटना के बाद हाईकोर्ट ने मामले में 30 सितंबर को स्वत: संज्ञान लेकर दिल्ली पुलिस आयुक्त, दिल्ली विधिज्ञ परिषद, सभी बार एसोसिएशन और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे थे।

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वकीलों को भी जांच के बाद प्रवेस का सुझाव
चेतन शर्मा ने कहा कि ‘मैं इसे बहुत सावधानी से कहूंगा कि भीड़भाड़ से सुरक्षा समस्या और भी गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि अदालतें आसान निशाने पर हैं।’ वहीं मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली बार काउंसिल (बीसीडी) ने पीठ को बताया कि अदालतों में वकीलों को इलेक्ट्रॉनिक चिप वाले एक नए स्मार्ट कार्ड से प्रवेश देने का सुझाव दिया है। बीसीडी ने कहा है कि इस तरह के कार्ड बनाने वाली एजेंसियों से बात करने के बात वकीलों को कार्ड जारी किया जाएगा। बीसीडी ने पीठ को बताया कि अदालतों में वकीलों को भी जांच के बाद भी प्रवेश देने का सुझाव दिया है।

सभी की ओर से पेश सुझावों के कुछ प्रमुख अंश
अदालत परिसरों में लोगों का प्रवेश सामान्य रूप से प्रतिबंधित होना चाहिए, नितांत जरूरी होने पर ही मिले प्रवेश। उच्च न्यायालय के साथ-साथ जिला अदालतों में वकीलों को जारी किए गए डिजीटल आईडी कार्ड की स्वचालित मशीन से जांच के बाद सुरक्षा जांच के बाद प्रवेश। वकीलों के क्लर्क/मुंशी के लिए अलग से डिजिटाइज्ड पहचान पत्र जारी किए जाएं। वादी प्रतिवादियों के साथ-साथ वकीलों की मेटल डिटेक्टर से तलाशी ली जाए। तलाशी का विरोध करने वाले वकीलों के खिलाफ बार काउंसिल द्वारा कदाचार के आरोप में कार्रवाई की जानी चाहिए। लॉ इंटर्न के लिए अलग ड्रेस होनी चाहिए। 15 दिनों पर सुरक्षा एजेंसी और संबंधित बार एसोसिएशन के बीच बैठक होनी चाहिए। अदालतों की सुरक्षा त्रिस्तरीय होनी चाहिए।
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