दिल्ली हाईकोर्ट के कड़े रवैये को देख आखिर ड्रग कंट्रोलर ने मान लिया कि कोविड-19 दवाओं के अनधिकृत स्टॉक की जमाखोरी के लिए गौतम गंभीर फाउंडेशन व आप विधायक प्रवीण कुमार जांच में दोषी पाए गए हैं। हाईकोर्ट को उक्त जानकारी देते हुए ड्रग कंटोलर ने कहा कि फाउंडेशन को बिना लाईलेंस के फेबीफ्लू दवा बेचने वाली फर्मो के खिलाफ भी ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट उक्त रिपोर्ट को देखने के बाद एक बार फिर सांसद गौतम गंभीर के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष ड्रग कंट्रोलर की और से पेश अधिवक्ता नंदिता राव ने बताया कि गौतम गंभीर फाउंडेशन ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन कर गैरकानूनी रूप से दवा जमा की। अदालत ने ड्रग कंट्रोलर को गौतम गंभीर, आप विधायक प्रवीण कुमार व अन्य के खिलाफ जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
ड्रग कंटोलर ने अदालत को बताया कि जांच में सामने आया है कि गौतम गंभीर फाउंडेशन ने लाइसेंस प्राप्त डीलरों से 2000 से अधिक स्ट्रिप्स खरीदी जबकि उनके पास ऐसा करने के लिए कोई वैध लाइसेंस नहीं था। उन्होंने कहा कि दवा बेचने वाली फर्मों को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इतना ही नहीं ये फर्में बिना लाइसेंस वाली फर्म यानी गौतम गंभीर फाउंडेशन को दवाएं बेचने के लिए मुकदमा के लिए भी उत्तरदायी हैं।
ड्रग कंट्रोलर ने कहा कि हम गौतम गंभीर फाउंडेशन के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के प्रावधानों तहत कार्रवाई शुरु करने जा रहे है। अदालत ने उनके तर्क पर कहा कि हमे आशा है कि आप फाउंडेशन के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? आप ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम के तहत तय नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बाध्य है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि हम चाहते हैं कि ड्रग कंट्रोलर सभी के खिलाफ समान रूप से कानून के तहत कार्रवाई करे। अदालत ने उन्हें छह सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को तय की है।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान गौतम गंभीर और आप विधायक प्रवीण कुमार द्वारा कोविड-19 दवाओं की जमाखोरी से संबंधित मामले में दिल्ली सरकार के ड्रग कंट्रोलर की असंतोषजनक जांच के लिए खिंचाई की थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि आप चाहते हैं कि हम अपनी आंखें बंद कर लें। यदि आप से ठीक से काम नहीं हो सकता तो हम किसी अन्य को जांच सौंप देगें।